44 वर्षों से अखंड आस्था की ज्योति, महामृत्युंजय मंदिर में फिर सजेगा नवरात्र का दिव्य दरबार
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11 अक्टूबर से मनोकामना ज्योति कलश स्थापना के साथ शुरू होगी नौ दिवसीय साधना, प्रतिदिन होगी माता की आरती
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व नहीं, बल्कि साधना, संकल्प और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा वह अवसर है, जब मंदिरों में आस्था का वातावरण विशेष रूप से जीवंत हो उठता है। कोरबा की निगम कॉलोनी स्थित श्री श्री 108 श्री महामृत्युंजय मंदिर भी ऐसी ही धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां पिछले 44 वर्षों से शारदीय नवरात्र में ज्योति कलश स्थापना की परंपरा निरंतर चली आ रही है। चार दशक से अधिक समय से जल रही यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं को साधना और भक्ति से जोड़ रही है।
इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। नवरात्र के प्रथम दिन मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए ज्योति कलश सीमित संख्या में प्रज्वलित किए जाएंगे, जिसके लिए पूर्व में नाम दर्ज कराया जा सकता है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान श्रद्धा और संकल्प के साथ प्रज्वलित की गई ज्योति साधना का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
तीन पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपरा
महामृत्युंजय मंदिर की विशेष पहचान केवल यहां होने वाले नवरात्र आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर की पूजा-अर्चना की परंपरा भी पीढ़ियों से चली आ रही है। मंदिर के वर्तमान पुजारी पंडित नागेश्वर पुरी गोस्वामी हैं, जो मंदिर के मुख्य एवं प्रथम पुजारी श्री प्रहलाद पुरी गोस्वामी की तीसरी पीढ़ी से हैं। वे श्री दिगम्बर अखिलेश पुरी महाराज, दशनाम नागा संन्यासी के शिष्य हैं।
प्रहलाद पुरी गोस्वामी द्वारा प्रारंभ की गई पूजा-अर्चना एवं धार्मिक परंपरा को उनके परिवार की अगली पीढ़ियां निरंतर आगे बढ़ा रही हैं। यही कारण है कि मंदिर में होने वाली पूजा और नवरात्र साधना स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए केवल वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी आस्था का हिस्सा है।
शाम 7:30 बजे गूंजेगी माता की आरती
शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण रहेगा। प्रतिदिन सायं 7:30 बजे माताजी की आरती होगी। आरती के समय श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना में शामिल होकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकेंगे।
नवरात्र की साधना के अंतिम चरण में 19 अक्टूबर, सोमवार, शुक्ल पक्ष नवमी को विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। सायं 5 बजे से हवन एवं पूर्णाहुति होगी। इसके साथ ही कन्या पूजन भी किया जाएगा।
ज्योति कलश से हवन तक, नौ दिनों तक भक्ति का विशेष संगम
नवरात्र के दौरान महामृत्युंजय मंदिर में ज्योति कलश स्थापना, माता की आरती, हवन-पूर्णाहुति और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धा का विशेष वातावरण निर्मित होगा। 44 वर्षों से चली आ रही ज्योति कलश स्थापना की परंपरा इस आयोजन को और विशिष्ट बनाती है।
महामृत्युंजय भगवान की आराधना से जुड़े इस मंदिर में नवरात्र के अवसर पर शक्ति उपासना और शिव आराधना का आध्यात्मिक संगम देखने को मिलेगा। वर्षों से चली आ रही परंपरा के कारण यह आयोजन मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
नवरात्र के पावन अवसर पर श्री श्री 108 श्री महामृत्युंजय मंदिर, निगम कॉलोनी, कोरबा में श्रद्धा की ज्योति एक बार फिर प्रज्वलित होगी। 44 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इस वर्ष भी भक्तिभाव, साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आगे बढ़ेगी।







