हर साल आश्वासन, हर साल जलभराव… आखिर कब मिलेगा चिमनी भट्ठा के लोगों को स्थायी समाधान?
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नाला निर्माण और सफाई के दावों के बावजूद वार्ड 13 में 40 से ज्यादा घर पानी में डूबे, वार्ड 14 भी जलभराव की चपेट में; नागरिक बोले—“हर साल बोलते हैं, मगर काम होता नहीं”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। बारिश ने एक बार फिर कोरबा नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। शनिवार, 29 अगस्त को हुई बारिश के बाद वार्ड नंबर 13 चिमनी भट्ठा में हालात इस कदर बिगड़ गए कि नाले का पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार 40 से ज्यादा घर जलभराव से प्रभावित हुए हैं। कई घरों में रखा राशन, घरेलू सामान और बच्चों की कॉपी-किताबें तक पानी की चपेट में आ गईं।
हालात को बयां करते वीडियो सामने आए हैं, जिनमें घरों और आसपास के इलाकों में भरे पानी से लोगों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। इन दृश्यों ने एक बार फिर उस सवाल को खड़ा कर दिया है, जो हर बारिश में चिमनी भट्ठा के नागरिकों के सामने खड़ा होता है—आखिर हर साल आश्वासन मिलने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं होता?
“हर साल बोलते हैं… मगर होता नहीं है काम”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई पहली बारिश नहीं है, जब उन्हें जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। हर साल बारिश के दौरान इसी तरह पानी घरों में घुसता है और हर साल समस्या के समाधान की बात कही जाती है, लेकिन जमीन पर स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आती।
लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर वार्ड पार्षद से भी शिकायत की थी। इसके बावजूद जल निकासी की ऐसी व्यवस्था नहीं बन पाई, जिससे बारिश के पानी को घरों और बस्तियों में प्रवेश करने से रोका जा सके।
नागरिकों का सवाल बेहद सीधा है—
जब समस्या हर साल सामने आती है तो उसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
बारिश थमती है, पानी उतरता है… लेकिन समस्या जस की तस
चिमनी भट्ठा के लोगों का कहना है कि बारिश के समय जलभराव होता है, लोग परेशान होते हैं, मौके पर पानी निकालने की कवायद होती है और कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। लेकिन अगली बारिश आते ही वही समस्या फिर सामने खड़ी हो जाती है।
यानी समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय क्या हर साल केवल तत्काल राहत तक ही व्यवस्था सीमित रह जाती है?
यही सवाल अब नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
वार्ड 14 में भी जलभराव, बारिश पूर्व तैयारियों पर सवाल
वार्ड 13 के साथ वार्ड नंबर 14 में भी जलभराव की स्थिति सामने आई है। इससे नगर निगम की बारिश पूर्व तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और आवश्यक निर्माण कार्य समय रहते ठीक ढंग से किए जाते, तो बारिश के बाद ऐसी स्थिति क्यों बनती?

लोगों का आरोप है कि हर साल नाला सफाई और जल निकासी व्यवस्था सुधारने की बातें होती हैं, लेकिन बारिश आते ही व्यवस्था की असली तस्वीर सामने आ जाती है।
जनता अब पूछ रही है—काम हुआ तो असर क्यों नहीं दिखा?
अब नागरिक केवल आश्वासन नहीं चाहते। वे यह जानना चाहते हैं कि क्षेत्र में जल निकासी को लेकर अब तक क्या-क्या काम हुए हैं और उनका परिणाम जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
नागरिकों के सवाल हैं—
नाला बना तो पानी घरों में क्यों घुसा?
सफाई हुई तो नाला बारिश में क्यों भर गया?
बार-बार शिकायत के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है तो पहले से तैयारी क्यों नहीं की गई?
और सबसे बड़ा सवाल—
“हर साल बोलते हैं कि समस्या दूर कर देंगे… मगर काम आखिर होता कब है?”
वीडियो में दिख रही तस्वीरें व्यवस्था पर खुद सवाल खड़े कर रही हैं
इस जलभराव से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। वीडियो में पानी से जूझते घरों और नागरिकों की परेशानी को देखा जा सकता है। कई स्थानों पर पानी घरों तक पहुंचने से लोगों को अपने सामान और जरूरी वस्तुओं को बचाने की मशक्कत करनी पड़ी।
ये दृश्य केवल बारिश की तस्वीर नहीं हैं, बल्कि जल निकासी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़ा करने वाले दृश्य हैं।
बारिश प्राकृतिक है, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए शहरी व्यवस्था तैयार रखना नगर निगम की जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि यदि एक सामान्य बारिश में ही घरों के भीतर पानी पहुंच जाता है, तो आखिर बारिश पूर्व तैयारी किस स्तर पर की गई थी?
पार्षद से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं, अब जवाब की मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने पहले भी अपने क्षेत्र की जलभराव की समस्या को लेकर पार्षद को अवगत कराया था। इसके बावजूद इस बार फिर वही स्थिति सामने आ गई।
नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को समस्या बताने का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज कराना नहीं, बल्कि उसका समाधान कराना है। यदि शिकायत के बाद भी हर वर्ष लोगों को अपने घरों में पानी भरने का सामना करना पड़े, तो फिर जवाबदेही तय होना जरूरी है।
जनता का सवाल—आखिर जिम्मेदारी किसकी?
अब चिमनी भट्ठा और वार्ड 14 के नागरिक यह जानना चाहते हैं कि इस समस्या की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
नगर निगम की?
जल निकासी व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की?
नाला निर्माण अथवा सफाई से जुड़े जिम्मेदारों की?
या फिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की?
लोगों की मांग है कि क्षेत्र में जलभराव की समस्या का स्थायी तकनीकी समाधान किया जाए। नालों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण हो, पानी की निकासी का मार्ग चिन्हित किया जाए और जहां आवश्यक हो वहां नाला निर्माण, चौड़ीकरण अथवा सुधार का काम कराया जाए।
अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए
बारिश का पानी आज या कल उतर जाएगा। घरों की सफाई भी हो जाएगी। खराब हुआ सामान शायद लोग फिर जुटा लेंगे।
लेकिन हर साल दोहराई जा रही इस समस्या का क्या?
नागरिकों की नाराजगी अब इसी बात को लेकर है कि हर बारिश के बाद कुछ समय के लिए समस्या सामने आती है और फिर अगले साल तक भुला दी जाती है।
इस बार नागरिकों की मांग स्पष्ट है—
“हमें आश्वासन नहीं चाहिए, हमें स्थायी समाधान चाहिए।”
“हर साल की तरह इस बार भी सिर्फ पानी मत निकालिए, ऐसी व्यवस्था बनाइए कि अगली बारिश में पानी घरों में न घुसे।”
चिमनी भट्ठा के नागरिकों की परेशानी ने नगर निगम के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—हर साल अगर यही स्थिति बनती है, तो आखिर अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
अब देखना यह है कि प्रशासन और नगर निगम इस बार भी केवल पानी निकलवाकर मामले को खत्म मानते हैं या जलभराव की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई करते हैं।







