जब गूंजेगी कविता, महकेगी भक्ति और सजेगी संस्कृति… सप्तदेव मंदिर में 10 सितंबर को होगा भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
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भादी अमावस्या की पूर्व संध्या पर दादी के श्रीचरणों में सजेगी काव्यांजलि, देशभर के ख्यात कवि-कवयित्रियाँ बिखेरेंगे अपनी रचनाओं का रंग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा, 28 अगस्त 2026। श्री भादी अमावस्या के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर कोरबा का श्री सप्तदेव मंदिर एक बार फिर भक्ति, साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत संगम का साक्षी बनने जा रहा है। 10 सितंबर 2026, गुरुवार को रात्रि 8 बजे से श्री सप्तदेव मंदिर परिसर में अखिल भारतीय भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष काव्य संध्या में देश के विभिन्न राज्यों से सुप्रसिद्ध कवि-कवयित्रियाँ अपनी रचनाओं के माध्यम से मां श्री रानी सती दादी के श्रीचरणों में भावपूर्ण काव्यांजलि अर्पित करेंगे।
भादी अमावस्या दादी भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था से जुड़ा अत्यंत विशेष अवसर माना जाता है। ऐसे पावन पर्व से ठीक एक दिन पूर्व आयोजित होने वाला यह कवि सम्मेलन धार्मिक आयोजन की गरिमा के साथ साहित्य और संस्कृति का ऐसा रंग बिखेरेगा, जो लंबे समय तक श्रोताओं की स्मृतियों में बना रहेगा।
भक्ति के आंगन में कविता का रंग, शब्दों में झलकेगी आस्था
श्री सप्तदेव मंदिर परिसर में होने वाली यह काव्य संध्या केवल कविताओं का मंच नहीं होगी, बल्कि भक्ति, अध्यात्म, राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, सामाजिक चेतना, हास्य-व्यंग्य और मानवीय संवेदनाओं का बहुरंगी उत्सव बनेगी।
कहीं कविताओं में मां रानी सती दादी के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावधारा प्रवाहित होगी, तो कहीं हास्य-व्यंग्य की फुहार श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर करेगी। राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाएं वातावरण में ऊर्जा भरेंगी, वहीं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताएं श्रोताओं को सोचने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का काम करेंगी।
मंदिर परिसर का भक्तिमय वातावरण और देशभर से आए रचनाकारों की सशक्त काव्य प्रस्तुतियां मिलकर इस रात को भक्ति और साहित्य की यादगार रात बनाने जा रही हैं।
देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचेंगे नामचीन रचनाकार
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों का आगमन होगा। अपनी विशिष्ट काव्य शैली और प्रभावशाली प्रस्तुतियों से वे कोरबा के साहित्यप्रेमियों एवं श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करेंगे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से—
सुश्री सोनल जैन, सूरत (गुजरात) — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन की सांस्कृतिक समिति की संयोजिका एवं सुप्रसिद्ध कवयित्री।
इंजीनियर विनोद नयन, जबलपुर (मध्यप्रदेश) — अपनी प्रभावशाली काव्य शैली के लिए पहचान रखने वाले रचनाकार।
श्री जयकुमार जय, भरतपुर (राजस्थान) — विविध विषयों पर अपनी विशिष्ट प्रस्तुति देने वाले सुप्रसिद्ध कवि।
श्री विमल सोनी, सूरत (गुजरात) — हास्य, व्यंग्य एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के लिए चर्चित कवि।
श्री बृजकिशोर पटेल, इटारसी (मध्यप्रदेश) — अपनी प्रभावी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को जोड़ने वाले रचनाकार।
इसके साथ ही कार्यक्रम की संयोजिका एवं कोरबा की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. अंजना सिंह ठाकुर भी अपनी काव्य प्रस्तुतियों से इस भव्य आयोजन में साहित्यिक रंग भरेंगी।
हंसी के ठहाकों से लेकर राष्ट्रभाव तक—हर रंग दिखेगा मंच पर
इस कवि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता होगी। मंच पर हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियां जहां वातावरण को खुशनुमा बनाएंगी, वहीं भक्ति और अध्यात्म से जुड़ी कविताएं श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ेंगी।
राष्ट्रप्रेम से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति की भावना जागृत होगी, तो सामाजिक विषयों पर आधारित कविताएं समाज में सकारात्मक सोच का संदेश देंगी।
अर्थात एक ही मंच पर भक्ति भी होगी, भावना भी होगी, हास्य भी होगा, व्यंग्य भी होगा और राष्ट्र व समाज के प्रति संवेदना भी होगी।
दादी भक्तों के लिए बनेगा विशेष आध्यात्मिक अनुभव
श्री भादी अमावस्या का पर्व मां श्री रानी सती दादी के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिलता है। श्री सप्तदेव मंदिर में भी इस पावन अवसर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने की परंपरा रही है।
मुख्य पर्व से पूर्व आयोजित होने वाला यह कवि सम्मेलन दादी भक्तों के लिए एक अलग ही अनुभव लेकर आएगा। मंदिर में भक्ति की भावना के बीच जब देशभर के रचनाकार अपनी कविताओं की प्रस्तुति देंगे, तो वातावरण में आस्था और साहित्य का अद्भुत संगम दिखाई देगा।
धर्म, संस्कृति और साहित्य को एक मंच पर लाने की पहल
आयोजकों के अनुसार धर्म और संस्कृति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं हैं। हमारी भाषा, साहित्य, परंपराएं, संस्कार और सामाजिक मूल्य भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए श्री सप्तदेव मंदिर में धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों को भी महत्व दिया जाता रहा है।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन इसी सोच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से रचनाकारों को कोरबा में एक मंच पर लाकर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना से जुड़े सकारात्मक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कोरबा के साहित्यप्रेमियों में बढ़ा उत्साह
कवि सम्मेलन की जानकारी सामने आने के बाद दादी भक्तों, साहित्यप्रेमियों और संस्कृति अनुरागियों में उत्साह का माहौल है। शहरवासियों के लिए यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि एक ही मंच पर विभिन्न राज्यों की काव्य परंपराओं और अलग-अलग रचनात्मक शैलियों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों का विश्वास है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं साहित्यप्रेमी परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचेंगे और इस भव्य काव्य संध्या को यादगार बनाएंगे।
परिवार सहित पहुंचने का आग्रह
छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन एवं कृष्णा ग्रुप ने कोरबा सहित आसपास के क्षेत्रों के दादी भक्तों, श्रद्धालुओं, साहित्यप्रेमियों एवं संस्कृति अनुरागियों से आग्रह किया है कि वे 10 सितंबर को रात्रि 8 बजे श्री सप्तदेव मंदिर परिसर में परिवार एवं इष्ट-मित्रों सहित उपस्थित होकर इस भव्य आयोजन का आनंद लें।
यह शाम केवल कविताएं सुनने की शाम नहीं होगी, बल्कि मां श्री रानी सती दादी के श्रीचरणों में भक्ति और साहित्य की सामूहिक अर्पण-भावना से जुड़ने का अवसर होगी।
भक्ति की धुन पर सजेगा शब्दों का संसार
10 सितंबर की रात श्री सप्तदेव मंदिर परिसर में जब देश के विभिन्न अंचलों से आए कवियों की आवाज गूंजेगी, तो मंदिर का वातावरण कभी भक्ति में डूबेगा, कभी हास्य के ठहाकों से गूंजेगा और कभी राष्ट्रप्रेम एवं सामाजिक चेतना की भावनाओं से ओतप्रोत होगा।
एक ओर दादी की भक्ति, दूसरी ओर कविता की शक्ति—इन्हीं दोनों का संगम इस काव्य संध्या को कोरबा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान दिलाने जा रहा है।
कार्यक्रम एक नजर में
स्थान: श्री सप्तदेव मंदिर परिसर, कोरबा
दिनांक: 10 सितंबर 2026, गुरुवार
समय: रात्रि 8:00 बजे से
आयोजन: अखिल भारतीय भव्य कवि सम्मेलन
विशेष अवसर: श्री भादी अमावस्या की पूर्व संध्या
आइए, मां श्री रानी सती दादी के श्रीचरणों में भक्ति, साहित्य और संस्कृति की इस अनुपम काव्यांजलि के सहभागी बनें और इस अविस्मरणीय काव्य संध्या को अपनी उपस्थिति से भव्य बनाएं।







