रक्षाबंधन पर बदली परंपरा की तस्वीर: कलाई नहीं, विशाल पीपल के तने पर बंधी राखी — डीडासराई में गूंजा ‘पेड़ है तो कल है’ का संदेश
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वन विभाग की पहल से प्रकृति के साथ जुड़ा भाई-बहन के प्रेम का पर्व, सामूहिक राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** लेमरू। रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, प्रेम और विश्वास की पहचान माना जाता है, लेकिन लेमरू वन परिक्षेत्र के डीडासराई में इस पर्व को प्रकृति से जोड़कर एक अनूठा और प्रेरणादायी संदेश दिया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर ‘एक राखी पेड़ के नाम’ कार्यक्रम आयोजित कर एक प्राचीन एवं विशाल पीपल वृक्ष को सामूहिक रूप से राखी बांधी गई। इस अनोखी पहल ने रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़ दिया।
वन मंडल कोरबा के अंतर्गत वन परिक्षेत्र लेमरू में रेंजर देवव्रत सिन्हा के मार्गदर्शन एवं वन विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में डीडासराई के ग्रामीणों, सज्जन नागरिकों एवं बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक पेड़ को राखी बांधना नहीं, बल्कि समाज को यह समझाना था कि जिस तरह भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी तरह मनुष्य और प्रकृति के बीच भी संरक्षण का रिश्ता होना चाहिए।
विशाल पीपल की पूजा, फिर बांधी सामूहिक राखी
कार्यक्रम में डीडासराई स्थित प्राचीन और विशालकाय पीपल वृक्ष की ग्राम बैगा समुदाय की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने पेड़ को सामूहिक रूप से राखी बांधी और पर्यावरण, जंगल तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संकल्प लिया।
राखी बांधने का यह दृश्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पेड़ के तने पर बंधी राखी प्रतीक बन गई कि प्रकृति भी हमारी जिम्मेदारी है और उसकी रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है।

आज के बच्चों और युवाओं के लिए बड़ा संदेश
कार्यक्रम ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को सोचने का अवसर दिया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में प्रकृति से उनका रिश्ता कहीं कमजोर तो नहीं हो रहा है। मोबाइल, इंटरनेट और तकनीक के इस दौर में नई पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि ऑक्सीजन, पानी, मिट्टी, वर्षा, जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण का आधार स्वस्थ प्राकृतिक परिवेश ही है।
बच्चों और युवाओं को चाहिए कि वे केवल पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी करें। अनावश्यक रूप से पेड़ों को नुकसान न पहुंचाएं, जंगलों में कचरा न फैलाएं, जलस्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएं और अपने आसपास अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करें।
एक पौधा लगाना शुरुआत, उसे पेड़ बनाना असली जिम्मेदारी
पर्यावरण संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे सुरक्षित रखकर बड़ा करना वास्तविक जिम्मेदारी है। एक पेड़ वर्षों तक मनुष्य और जीव-जंतुओं को छाया, आश्रय और प्राकृतिक संतुलन में योगदान देता है। इसलिए बच्चों और युवाओं को अपने जन्मदिन, त्योहार, विशेष अवसर या किसी पारिवारिक कार्यक्रम को पौधारोपण और उसकी देखभाल से जोड़ने की पहल करनी चाहिए।
‘पेड़ बचेंगे तो पीढ़ियां बचेंगी’
डीडासराई में आयोजित ‘एक राखी पेड़ के नाम’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। जंगल, पेड़-पौधे, जल और प्राकृतिक संसाधन समाज की साझा धरोहर हैं।
कार्यक्रम में वन रक्षक डीडासराई प्रकाश कंवर एवं वन विभाग के स्टाफ के साथ डीडासराई के सज्जन नागरिकों और वरिष्ठजनों की उपस्थिति रही। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।
रक्षाबंधन पर पेड़ को बांधी गई यह राखी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खूबसूरत संदेश छोड़ गई—रिश्ते केवल इंसानों से नहीं, प्रकृति से भी निभाने पड़ते हैं। पेड़ को बचाना आज की जिम्मेदारी है और यही आने वाले कल की सबसे बड़ी सुरक्षा है।







