भारी बारिश में ‘बिना वाइपर’ दौड़ रही बसें, क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** चांपा–कोरबा राजधानी मार्ग पर यात्री बसों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, जांच के इंतजार में व्यवस्था या हादसे का?
कोरबा/चांपा। लगातार हो रही बारिश के बीच चांपा–कोरबा मार्ग पर दौड़ रही कुछ यात्री बसों की हालत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बारिश के दौरान जब सड़क पर दृश्यता पहले ही कम हो जाती है, ऐसे समय में बिना वाइपर या खराब वाइपर के बसों के संचालन के आरोप सामने आना यात्रियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
बारिश में चालक के लिए सामने की सड़क स्पष्ट दिखाई देना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में यदि किसी बस का वाइपर काम नहीं कर रहा हो या पर्याप्त रूप से पानी साफ नहीं कर रहा हो, तो यह महज बस की तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सड़क पर सफर कर रहे यात्रियों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।
क्या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग सड़क पर उतरकर यात्री बसों की जांच कर रहा है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई की जाएगी?
चांपा–कोरबा मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री बसें चलती हैं। बारिश के मौसम में इन बसों की फिटनेस, वाइपर, ब्रेक, टायर, लाइट, इंडिकेटर और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में यदि कुछ बसें कथित तौर पर खराब वाइपर के साथ संचालित हो रही हैं, तो यह जांच का विषय है कि क्या ऐसी बसों को सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए?
‘चांपा–कोरबा राजधानी’ में सफर या जिंदगी का जोखिम?
यात्रियों के लिए बस केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि सुरक्षित घर पहुंचने का भरोसा होती है। लेकिन यदि बारिश जैसे चुनौतीपूर्ण मौसम में वाहन की मूलभूत सुरक्षा व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं है, तो यात्रियों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
बारिश सड़क पर हो रही है, लेकिन खतरा बस के भीतर बैठे यात्रियों की जिंदगी पर मंडरा सकता है। यही वजह है कि यात्री बसों की तकनीकी स्थिति को लेकर तत्काल गंभीरता दिखाए जाने की जरूरत है।
सिर्फ एक-दो बस नहीं, पूरे रूट की हो जांच
यदि एक बस में वाइपर से जुड़ी समस्या सामने आती है तो सवाल उठता है कि क्या ऐसी स्थिति दूसरी बसों में भी हो सकती है? इसलिए केवल किसी एक वाहन की जांच तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए।
चांपा–कोरबा मार्ग पर संचालित सभी यात्री बसों की व्यापक सुरक्षा जांच किए जाने की मांग उठ रही है। जांच में वाइपर के साथ-साथ ब्रेक, टायर, हेडलाइट, इंडिकेटर, आपातकालीन उपकरण, फिटनेस प्रमाण-पत्र और अन्य सुरक्षा मानकों को भी देखा जाना चाहिए।
यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
बस मालिकों और संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने वाहनों को सुरक्षित स्थिति में सड़क पर उतारें। वहीं प्रशासन और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन सुनिश्चित हो।
सवाल सीधा है—क्या बसों की फिटनेस सिर्फ कागजों पर जांची जाएगी या सड़क पर भी दिखाई देगी?
बारिश का मौसम पहले से ही सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि चांपा–कोरबा मार्ग पर तत्काल विशेष जांच अभियान चलाकर यात्री बसों की वास्तविक स्थिति की जांच करें।
हादसा होने के बाद मुआयना और कार्रवाई करने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले ही व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया जाए। यात्रियों की सुरक्षा किसी भी परिवहन व्यवस्था की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस शिकायत को गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर व्यवस्था किसी अनहोनी के बाद ही जागेगी।







