“हमें खाना दो, सुरक्षा दो” — बेटियों का फूटा आक्रोश, बदहाल कन्या छात्रावास के खिलाफ सड़क पर उतरी छात्राएं
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घटिया भोजन, जर्जर भवन, खराब पंखे और मूलभूत सुविधाओं की कमी के आरोप; बाहरी व्यक्ति के कथित हस्तक्षेप ने खड़े किए सुरक्षा पर गंभीर सवाल — प्रशासनिक जांच के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** सूरजपुर/रामानुजनगर
जिस उम्र में बेटियों के हाथों में किताबें और आंखों में बेहतर भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें अपने बुनियादी अधिकारों—पौष्टिक भोजन, सुरक्षित वातावरण और सम्मानजनक रहने की व्यवस्था—के लिए सड़क पर बैठकर आवाज उठानी पड़े, तो यह केवल एक छात्रावास की समस्या नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के सामने खड़ा गंभीर सवाल है।
विकासखंड रामानुजनगर के ग्राम भूनेश्वरपुर स्थित प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की कथित बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ सोमवार को छात्राओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। छात्रावास की आदिवासी छात्राएं “हमें खाना दो, सुरक्षा दो” जैसे नारे लगाते हुए रामानुजनगर-कालुवा स्टेट हाईवे पर बैठ गईं। तेज धूप के बीच प्रदर्शन कर रही कई छात्राएं अपनी परेशानियां बताते-बताते भावुक हो गईं।
भोजन को लेकर छात्राओं की गंभीर शिकायतें
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन और नाश्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। छात्राओं के अनुसार भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें हैं। उन्होंने सड़े-गले चावल, खराब सब्जियां और बेहद पतली दाल परोसे जाने जैसे आरोप लगाए।
छात्राओं ने साबुन, तेल, टूथपेस्ट सहित दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराने की भी शिकायत की। सवाल यह है कि यदि छात्रावास में रहने वाली बेटियों के लिए शासन की ओर से निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर उन सुविधाओं का लाभ उन्हें नियमित रूप से क्यों नहीं मिल रहा?
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, बाहरी व्यक्ति के कथित हस्तक्षेप की जांच की मांग
सबसे गंभीर आरोप छात्रावास की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था को लेकर सामने आए। छात्राओं का आरोप है कि अधीक्षिका की अनुपस्थिति में उनके 23 वर्षीय पुत्र द्वारा छात्रावास की व्यवस्थाओं में कथित रूप से हस्तक्षेप किया जाता है।
छात्राओं ने बालिका छात्रावास में किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी और कथित हस्तक्षेप की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर तथ्यों के आधार पर किए जाने की मांग उठी है।
बारिश में टपकती छत, गर्मी में खराब पंखे—कैसे पढ़ेंगी बेटियां?
छात्राओं ने छात्रावास भवन और रसोईघर की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जबकि गर्मी के दिनों में कई पंखे खराब रहने के कारण परेशानी होती है। पर्याप्त बिस्तरों की कमी की शिकायत भी छात्राओं ने की।
ऐसे वातावरण में रहने वाली बेटियों से बेहतर पढ़ाई और अच्छे परिणाम की उम्मीद करना कितना उचित है—यह सवाल भी अब प्रशासन के सामने है।
“यह राजनीति नहीं, बेटियों के भविष्य और सुरक्षा का सवाल”
प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीण और छात्र नेता भी मौके पर पहुंचे। जिला मीडिया प्रभारी अविनाश साहू, विक्की यादव, हुसैन अंसारी, सुमंत राजवाड़े सहित अन्य लोगों ने छात्राओं की मांगों का समर्थन किया।
कांग्रेस नेता अविनाश साहू ने कहा कि मामला राजनीति से कहीं अधिक बेटियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि शिकायतों का उचित निराकरण नहीं हुआ तो जिला कलेक्टर कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला स्तरीय टीम पहुंची, आश्वासन के बाद शांत हुआ आक्रोश
छात्राओं के सड़क पर उतरने की सूचना प्रशासन तक पहुंचने के बाद जिला स्तरीय टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और शिकायतों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
हालांकि अब असली परीक्षा प्रशासन की है। सिर्फ आश्वासन से नहीं, बल्कि जांच और ठोस कार्रवाई से यह साबित होगा कि छात्राओं की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया गया है।
इन मांगों को लेकर उठी आवाज
छात्राओं और क्षेत्रवासियों ने अधीक्षिका के खिलाफ जांच, छात्रावास में बाहरी व्यक्ति के कथित हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच, राशन एवं स्टॉक रजिस्टर सहित बिल-वाउचर का भौतिक सत्यापन, निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन, पर्याप्त बिस्तर और दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही जर्जर भवन की मरम्मत, खराब पंखों को बदलने तथा पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग भी रखी गई है।
सबसे बड़ा सवाल—बेटियों को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?
भूनेश्वरपुर की इन छात्राओं का सड़क पर उतरना व्यवस्था के लिए चेतावनी से कम नहीं है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि छात्रावास में रहने वाली नन्हीं बेटियों को अपनी थाली, अपनी सुरक्षा और अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठना पड़ा?
यह सवाल केवल भूनेश्वरपुर का नहीं, बल्कि उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों से है जिनके भरोसे इन बेटियों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच हो। छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय हो और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट की जाए। लेकिन सबसे जरूरी यह है कि छात्रावास में रहने वाली हर बेटी को पौष्टिक भोजन, सुरक्षित वातावरण, सम्मान और आवश्यक सुविधाएं मिलें—क्योंकि बेटियों को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आनी चाहिए।







