SECL मानिकपुर विस्तार पर ग्रामीणों का बड़ा विरोध!
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21 अगस्त की जनसुनवाई रद्द नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी, वर्षों से विस्थापन और रोजगार के मुद्दों पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//** कोरबा दिलीप कुमार वैष्णव
SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर कोरबा में ग्रामीणों और भू-विस्थापितों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। भिलाई खुर्द, दादर खुर्द, रापाखर्रा और मानिकपुर क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों ने 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग उठाते हुए प्रशासन और SECL प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पहले विकास और खनन परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीनें चली गईं, लेकिन बदले में रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत अधिकारों का सवाल आज भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।

जमीन गई, लेकिन रोजगार का इंतजार खत्म नहीं हुआ!
ग्रामीणों के विरोध का सबसे बड़ा केंद्र रोजगार और विस्थापन का मुद्दा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर का कहना है कि लंबे समय से प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से 400 युवाओं की नियमित भर्ती की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब उनकी जमीन और क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा परियोजना के लिए उपयोग में लाई जा रही है, तो प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार का अधिकार क्यों नहीं मिल रहा?
यही सवाल अब आंदोलन की मुख्य वजह बनता दिखाई दे रहा है।
भिलाई खुर्द में जमीन-मकानों के मूल्यांकन पर सवाल
ग्रामीणों ने भिलाई खुर्द की जमीन और मकानों का दोबारा पारदर्शी मूल्यांकन कराने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि मुआवजा और मूल्यांकन से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों की संतुष्टि के अनुरूप समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीण चाहते हैं कि जमीन और मकानों का मूल्यांकन निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से हो, ताकि किसी भी प्रभावित परिवार को अपने अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

रापाखर्रा के विस्थापितों का रोजगार और रास्ते को लेकर सवाल
रापाखर्रा क्षेत्र के विस्थापित भी अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ आवागमन के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन केवल जमीन छोड़ने का नाम नहीं है। यदि किसी परिवार की जमीन चली जाती है, तो उसके बाद रोजगार, आवागमन, पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना जरूरी है।
दादर खुर्द में ओबी डंपिंग का विरोध
विरोध का एक बड़ा मुद्दा दादर खुर्द की कृषि भूमि पर ओबी डंपिंग भी है। ग्रामीणों ने कृषि भूमि पर ओवरबर्डन डंपिंग रोकने की मांग की है।
ग्रामीणों का तर्क है कि कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का आधार है। ऐसे में खनन विस्तार के नाम पर कृषि भूमि प्रभावित होने से आने वाले समय में उनके सामने रोजगार और जीवन-यापन का संकट और गहरा सकता है।
जनसुनवाई से पहले ही क्यों भड़का विरोध?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्षों पुराने विस्थापन, रोजगार, मुआवजा और भूमि से जुड़े मुद्दे पूरी तरह सुलझे नहीं हैं, तो ऐसे में परियोजना विस्तार को लेकर जनसुनवाई आगे बढ़ाने की जल्दबाजी क्यों?
भू-विस्थापित संगठन का आरोप है कि पहले प्रभावितों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए और उसके बाद परियोजना विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
यही वजह है कि 21 अगस्त की जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
कलेक्टर को सौंपा पत्र, प्रशासन से निर्णायक हस्तक्षेप की मांग
भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को पत्र सौंपते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों की मांगों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराने की कोशिश की गई तो 21 अगस्त को कल्याण मंडप में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संगठन ने प्रशासन और SECL प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया और स्थिति बिगड़ी, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक एवं प्रबंधन स्तर पर होगी।
अब गेंद प्रशासन के पाले में
मानिकपुर में उठ रहा यह विरोध केवल एक जनसुनवाई को लेकर असहमति नहीं, बल्कि विस्थापन, रोजगार, मुआवजा, कृषि भूमि और पुनर्वास जैसे लंबे समय से चले आ रहे सवालों का उबाल बनता जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन 21 अगस्त से पहले ग्रामीणों की मांगों पर ठोस पहल करेगा?
क्या SECL प्रबंधन प्रभावित परिवारों के रोजगार, भूमि-मूल्यांकन, रास्ते और ओबी डंपिंग जैसे मुद्दों पर स्पष्ट समाधान सामने रखेगा? या फिर जनसुनवाई के दिन मानिकपुर में ग्रामीणों का विरोध और प्रशासन के बीच आमना-सामना देखने को मिलेगा?
21 अगस्त की तारीख अब केवल जनसुनवाई की तारीख नहीं रह गई है। यह प्रशासन और SECL प्रबंधन के सामने ग्रामीणों के वर्षों पुराने सवालों का जवाब देने की अग्निपरीक्षा बनती जा रही है।


