‘जय जोहार’ के उद्घोष से गूंजा पीएम श्री सेजस करतला, बच्चों ने मंच पर जीवंत की आदिवासी संस्कृति और विरासत
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** करतला। पीएम श्री सेजस करतला में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति प्रेम और छत्तीसगढ़ की लोक विरासत की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पक्ष यह रहा कि बच्चों ने स्वयं इसकी पूरी जिम्मेदारी संभाली और सीमित समय में तैयार होकर मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम एसएमडीसी अध्यक्ष श्री आकाश सक्सेना के मुख्य आतिथ्य तथा प्रभारी प्राचार्य श्री दुबराज सिंह राठिया की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी एवं धरती आबा बिरसा मुंडा के पूजन से किया गया। बालिकाओं ने अतिथियों का आदिवासी परंपरा के अनुरूप थाली-लोटा से हाथ धुलाकर तथा हल्दी-चावल का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया।

इसके बाद विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने आदिवासी वेशभूषा में सजकर ‘जय जोहार, जय आदिवासी’ के उद्घोष से वातावरण को उत्साह और गौरव से भर दिया। ‘हम तो आदिवासी आन’ गीत पर बच्चों की प्रस्तुति ने खूब आकर्षित किया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ महतारी, भारत माता और आदिवासी बाला के रूप में बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने मंच पर अपनी भूमिका के माध्यम से छत्तीसगढ़ की माटी, देशप्रेम और आदिवासी अस्मिता का संदेश दिया। वहीं धरती आबा युवा बिरसा मुंडा के रूप में विद्यार्थी की प्रस्तुति ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध उनके संघर्ष और साहस को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम की रूपरेखा आयोजन से केवल एक दिन पहले तय की गई थी, इसके बावजूद विद्यार्थियों ने मंच संचालन से लेकर कार्यक्रम की तैयारी, संसाधन जुटाने और प्रस्तुतियों तक की जिम्मेदारी स्वयं संभाली। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को केवल सांस्कृतिक आयोजन न बनाकर सीखने, नेतृत्व करने और अपनी संस्कृति को समझने का जीवंत अवसर बना दिया।
मुख्य अतिथि श्री आकाश सक्सेना ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव हमारे आसपास के जीवन में स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमें प्रकृति के संरक्षण, प्रकृति से जुड़ाव और आपसी अपनत्व की भावना की सीख देता है।

व्याख्याता मनोज तिग्गा ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक सभी को साथ लेकर चलने की भावना है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्राचार्य श्री दुबराज सिंह राठिया ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रकृति से गहरे संबंधों की चर्चा करते हुए विवाह की परंपराओं, आदिवासी देवी-देवताओं की स्थापना तथा प्रकृति आधारित जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं को समझाया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों की सराहना करते हुए मुख्य अतिथि एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ी में ईष्था महंत तथा हिंदी में रागिनी पटेल एवं अनिमा अगरिया ने किया। विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विश्व आदिवासी दिवस समारोह को यादगार बना दिया।


