August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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“धान पर निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक: वेदांता बालको ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर”

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महिलाओं के नेतृत्व, कौशल विकास और बहु-आय स्रोतों से छत्तीसगढ़ के गांवों में आर्थिक क्रांति
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**//**   कोरबा/रायपुर
छत्तीसगढ़ को लंबे समय से ‘धान का कटोरा’ कहा जाता रहा है, लेकिन अब राज्य के ग्रामीण इलाकों में आजीविका का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक ही फसल पर निर्भरता से निकलकर बहु-आय मॉडल की ओर बढ़ते इस परिवर्तन में वेदांता बालको की भूमिका निर्णायक बनकर उभरी है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा जिलों के 123 गांवों में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए 2 लाख से अधिक ग्रामीणों के जीवन में ठोस बदलाव दर्ज किया गया है।
जहां पहले किसान पूरी तरह बारिश और धान की फसल पर निर्भर थे, वहीं अब कृषि के साथ-साथ वैकल्पिक आय के स्रोतों का विस्तार हो रहा है। इस बदलाव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक स्थिर और लचीला बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।
👩 महिलाओं ने संभाली आर्थिक कमान
ग्रामीण परिवर्तन की इस कहानी के केंद्र में महिलाएं हैं, जो अब परिवार की सहायक नहीं बल्कि मुख्य कमाने वाली बनती जा रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 6,000 से ज्यादा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।
इन समूहों ने पारंपरिक बचत तक सीमित रहने के बजाय अब छोटे व्यवसायों और उद्यमों के जरिए नियमित आय का जरिया तैयार किया है। वर्तमान में 600 से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं, जबकि 45 गांवों में 2,200 से अधिक महिलाएं नैनो-बिजनेस और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
कोरबा की विजय लक्ष्मी सारथी इसका सशक्त उदाहरण हैं। कठिन परिस्थितियों से जूझने के बाद उन्होंने घर से फूड बिजनेस शुरू किया और आज हर महीने ₹12,000 से ₹15,000 तक कमा रही हैं। इसी तरह समूह आधारित उद्यमों में महिलाएं सामूहिक उत्पादन के जरिए स्थायी आय अर्जित कर रही हैं।
🎓 कौशल विकास से बदली युवाओं की दिशा
ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए वेदांता स्किल स्कूल एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया है। वर्ष 2010 से अब तक 15,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हर साल 1,000 से ज्यादा युवाओं को उद्योग आधारित कौशल सिखाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन प्रशिक्षित युवाओं को देशभर की 70 से अधिक संस्थाओं में प्लेसमेंट मिल रहा है, जहां सालाना वेतन ₹3 लाख तक पहुंच रहा है।
कोरबा के पोड़ीबहार निवासी आर्यन दास महंत ने फूड एंड बेवरेज सर्विस का प्रशिक्षण लेकर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी हासिल की और अब ‘ट्रेनी कैप्टन’ के रूप में कार्यरत हैं। उनकी आय अब परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रही है।
📚 शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत कड़ी
शिक्षा के क्षेत्र में भी बालको के प्रयास व्यापक असर डाल रहे हैं। कोरबा और कवर्धा में संचालित कोचिंग केंद्रों के माध्यम से हर साल 300 से अधिक छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है, जिनमें से दर्जनों का चयन भी हो चुका है।
इसके साथ ही 110 ‘नंद घर’ केंद्रों के माध्यम से 7,000 से अधिक बच्चों और माताओं को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सेवाएं मिल रही हैं। स्कूल सहायता कार्यक्रमों के जरिए 4,000 से अधिक छात्रों को लाभ मिला है, जिससे शिक्षा से रोजगार तक का मार्ग और स्पष्ट हुआ है।
🏗️ मजबूत हो रहा ग्रामीण इकोसिस्टम
सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सुधार भी इस परिवर्तन की अहम कड़ी है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रामीणों को अचानक आने वाले आर्थिक संकटों से राहत मिल रही है, वहीं सड़क, बाजार और अन्य सुविधाओं के विकास से रोजगार और प्रशिक्षण तक पहुंच आसान हुई है।
यह समग्र मॉडल ग्रामीणों को सिर्फ आय नहीं देता, बल्कि उन्हें स्थायी और सुरक्षित आजीविका की ओर अग्रसर करता है।
🔄 एक फसल से बहु-आय की ओर बदलाव
अब गांवों में एक बड़ा बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। किसान केवल धान पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि खेती के साथ-साथ छोटे व्यवसाय, नौकरी और स्वरोजगार के जरिए आय के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।
वेदांता बालको का यह मॉडल खेती को प्रतिस्थापित नहीं करता, बल्कि उसे मजबूत आधार मानते हुए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार करता है। यही कारण है कि अब ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से अधिक स्थिर, आत्मनिर्भर और भविष्य के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ के गांवों में हो रहा यह बदलाव केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नई ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की कहानी है—जहां महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, युवा कौशल से सशक्त हो रहे हैं और परिवार बहु-आय मॉडल के जरिए आत्मनिर्भर बन रहे हैं। वेदांता बालको का यह प्रयास आने वाले समय में ग्रामीण विकास का एक आदर्श मॉडल साबित हो सकता है।

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