“भक्ति के नाम पर भरोसे की लूट! श्याम मंदिर में 65 लाख की गड़बड़ी—आस्था को बना दिया कमाई का जरिया?”



कोरबा के श्याम मंदिर में 65 लाख की वित्तीय अनियमितताएं उजागर, पूर्व पदाधिकारी घेरे में
हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच में खुली परतें—दान, यात्रा और उत्सव के नाम पर गंभीर गड़बड़ियां, जवाब देने से भी बचते रहे जिम्मेदार
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//** कोरबा। शहर के मिशन रोड स्थित श्री श्याम मंदिर से जुड़े श्री श्याम मित्र मंडल में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं ने आस्था को झकझोर कर रख दिया है। माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर एवं रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसाइटी, रायपुर के निर्देश पर हुई जांच में ₹65,75,758 की चौंकाने वाली आर्थिक गड़बड़ियां सामने आई हैं।
जांच रिपोर्ट में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। वर्ष 2023-24 के दौरान वित्तीय प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने से धार्मिक संस्था की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
🔍 जांच में क्या-क्या खुलासा हुआ:
💰 नगद राशि में खेल:
संस्था की नगद राशि को बैंक में जमा करने में नियमों की अनदेखी हुई। शिकायत के बाद ₹11.21 लाख में से केवल ₹10 लाख ही जमा कराए गए—बाकी राशि पर सवाल कायम।
🚆 खाटू श्याम रेलयात्रा में भ्रम:
लंबे समय तक प्रचार के बावजूद यात्रा की कोई ठोस तैयारी नहीं मिली। आखिरी समय में “पेंट्री कार नहीं मिलने” का बहाना बनाकर कार्यक्रम रद्द किया गया, जिसे जांच में भ्रामक बताया गया।
📊 दान-पेटी और संकीर्तन की आय गायब:
दान पेटी, मासिक संकीर्तन, श्रृंगार आदि से मिली राशि का समुचित लेखा-जोखा रिकॉर्ड में नहीं मिला।
📑 खर्चों के अपूर्ण दस्तावेज:
वार्षिक उत्सव सहित कई मदों में खर्च दिखाए गए, लेकिन उनके पुख्ता दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
🪙 मंदिर की चांदी की बिक्री:
नियमों के विरुद्ध चांदी बेचने का मामला भी सामने आया, जिससे आस्था के साथ खिलवाड़ की आशंका गहराई।
🧾 सदस्यता शुल्क भी गायब:
सदस्यता से प्राप्त राशि को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया।
📉 ऑडिट में भी खेल:
ऑडिट रिपोर्ट को आमसभा में विधिवत अनुमोदन के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया—सिर्फ औपचारिकता निभाई गई।
⚠️ नोटिस के बाद भी चुप्पी
जांच के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को कई बार नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने न तो संतोषजनक जवाब दिया और न ही सहयोग किया। यह रवैया खुद कई सवाल खड़े करता है।
⚖️ अब क्या होगा?
जांच अधिकारी ने स्पष्ट अनुशंसा की है कि संबंधित पदाधिकारी पूरी गड़बड़ी की राशि संस्था के बैंक खाते में जमा करें। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है।
❓ सबसे बड़ा सवाल: आखिर ऐसा क्यों?
धार्मिक संस्थाएं जहां श्रद्धा और विश्वास का केंद्र होती हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि कुछ लोग आस्था को अवसर क्यों बना लेते हैं?
क्या निगरानी की कमी, जवाबदेही का अभाव या व्यक्तिगत लालच—इन सबका मेल ऐसी घटनाओं को जन्म देता है?
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कोरबा के श्याम मंदिर से जुड़ा यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि भरोसे पर चोट है। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या इस घटना से अन्य धार्मिक संस्थाएं सबक लेंगी।


