April 16, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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भक्ति में डूबा कोरबा: जयघोष, भजन और उल्लास के बीच श्रीराम जन्मोत्सव, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व रुक्मणी विवाह उत्सव भव्य रूप से संपन्न

 

 

भक्तगण खूब झूमे, भजन-कीर्तन में उमड़ा उत्साह, देर रात तक गूंजता रहा कथा पंडाल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**  कोरबा। संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के पावन अवसर पर कोरबा पूरी तरह भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा में सराबोर नजर आया। वैषाख कृष्ण पक्ष की पावन तिथियों पर आयोजित श्रीराम जन्मोत्सव, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तथा श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति के बीच अत्यंत भव्य और यादगार तरीके से संपन्न हुआ। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण “जय श्रीराम” एवं “राधे-कृष्ण” के गगनभेदी जयघोष से गूंजता रहा।

 

 

कथा वाचक पं. श्रीकांत दुबे जी के मधुर स्वर में प्रस्तुत संगीतमय कथा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के प्रत्येक प्रसंग पर भक्त भावविभोर होकर झूमते नजर आए। वहीं आयोजन आचार्य पं. श्री क्षेमचंद प्रेमचंद दुबे जी के सान्निध्य में सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।

 

 

भव्य सजावट और जयघोष के बीच मनाया गया श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
14 अप्रैल 2026, मंगलवार को वैषाख कृष्ण पक्ष द्वादशी के अवसर पर भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अद्भुत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कथा पंडाल को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक झांकियों और रोशनी से भव्य रूप दिया गया था।
जैसे ही भगवान के जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल एक साथ खड़ा हो गया और तालियों व जयघोष से वातावरण गूंज उठा। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों पर भक्तगण झूम उठे, कई श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करते नजर आए। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, जिससे आयोजन का माहौल और अधिक जीवंत हो गया।

 

 

 

रंगीन बारात और मंगल गीतों के बीच हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव
15 अप्रैल 2026, बुधवार को वैषाख कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी का विवाह उत्सव अत्यंत धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल को भव्य विवाह मंडप में परिवर्तित किया गया, जहां बारात, जयमाला और विवाह की सभी रस्में पूरे विधि-विधान से निभाई गईं।
विवाह उत्सव के दौरान मंगल गीतों और शहनाई की धुनों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु बारात में शामिल होकर झूमते-नाचते नजर आए और पुष्प वर्षा कर अपनी आस्था व्यक्त की। यह दृश्य किसी दिव्य उत्सव से कम नहीं था।
आयोजन समिति ने बताया कि इस संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ ने क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का नया संचार किया है। भारी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया। अंत में प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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