“60 मिनट की कुर्सी, फिर बर्खास्तगी!” कांग्रेस में ‘नियुक्ति ड्रामा’ पर भाजपा का तीखा हमला



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “सिर्फ एक घंटे में नियुक्ति और फिर रद्द होना, कांग्रेस की अंदरूनी फूट और कमजोर नेतृत्व का जीता-जागता प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब पूरी तरह से नेतृत्वविहीन और अनुशासनहीन पार्टी बन चुकी है, जहां गुटबाज़ी इतनी हावी हो गई है कि कोई भी नेता दूसरे को स्वीकार करने को तैयार नहीं।
एक घंटे में नियुक्ति और रद्द — बना चर्चा का विषय
भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि रायपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार मेमन द्वारा वार्ड अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की गई, लेकिन महज एक घंटे के भीतर ही कांग्रेस प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने उन नियुक्तियों को रद्द कर दिया।
रद्द करने का कारण यह बताया गया कि इन नियुक्तियों के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी से न तो अनुशंसा ली गई और न ही अनुमोदन। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस संगठन के भीतर समन्वय की कमी और अव्यवस्था को उजागर कर दिया।
नलिनीश ठोकने ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि “घंटेभर की नियुक्ति हास्यास्पद है और कांग्रेस की आंतरिक अव्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
“कांग्रेस में अंतर्कलह अब सड़क पर”
नलिनीश ठोकने ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ चुका है—
सूरजपुर में पूरी कार्यकारिणी का सामूहिक इस्तीफा
दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष का इस्तीफा
विभिन्न जिलों में लगातार संगठनात्मक विवाद
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के बड़े नेताओं की आपसी खींचतान अब निचले स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे संगठन की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
दीपक बैज के नेतृत्व पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “यह घटनाक्रम उनकी कमजोर नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। उनके नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है।”
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “दीपक बैज को इस ‘सबसे कम समय की नियुक्ति’ के लिए गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की कोशिश करनी चाहिए।”
🔥 स्पष्ट है कि ‘एक घंटे की नियुक्ति’ का यह मामला अब राजनीतिक तंज और आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसने कांग्रेस के भीतर की कलह को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।


