April 1, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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वनांचल में उमड़ा आस्था का महाकुंभ: राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति में 108 निर्धन कन्याओं का विवाह, दिव्य श्री हनुमंत कथा का ऐतिहासिक समापन

 

 

अपना घर सेवा समिति ने सेवा, संस्कार और सनातन चेतना का रचा स्वर्णिम अध्याय — मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय, नन्हा महाराज सहित अनेक जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों की रही अहम भूमिका
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा/बांकीमोंगरा।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) की पावन और पुण्यमयी धरती ने वह ऐतिहासिक दृश्य देखा, जिसने न केवल पूरे क्षेत्र को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर किया, बल्कि सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की अद्भुत मिसाल भी प्रस्तुत कर दी।
घने जंगलों, प्राकृतिक शांति और ग्रामीण पवित्रता के बीच आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा का पांच दिवसीय भव्य आयोजन अपने समापन पर ऐसी विराट छाप छोड़ गया, जिसे वर्षों तक श्रद्धा और गौरव के साथ याद किया जाएगा।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, सेवा, नारी सम्मान, लोककल्याण, समाजजागरण और सांस्कृतिक एकता का विशाल महापर्व बन गया।
वनांचल क्षेत्र के बीच बसे एक छोटे से ग्राम में जिस स्तर का जनसैलाब, अनुशासन, आध्यात्मिक उर्जा और सामाजिक सहभागिता देखने को मिली, उसने यह सिद्ध कर दिया कि जहां आस्था हो, वहां जंगल भी तीर्थ बन जाते हैं और जहां सेवा हो, वहां गांव भी इतिहास रच देते हैं।
राज्यपाल श्री रमेन डेका की उपस्थिति ने आयोजन को बनाया ऐतिहासिक
इस भव्य और पावन आयोजन की सबसे विशेष और गौरवपूर्ण बात यह रही कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका स्वयं इस आयोजन में उपस्थित हुए और अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को ऐतिहासिक आयाम प्रदान किया।

 

 

राज्यपाल ने कथा स्थल पहुंचकर न केवल आयोजन की भव्यता और व्यवस्था का अवलोकन किया, बल्कि 108 निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह में स्वयं उपस्थित रहकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद भी प्रदान किया।
विवाह समारोह का शुभारंभ राज्यपाल श्री रमेन डेका की उपस्थिति में वरमाला कार्यक्रम से हुआ, जिसने इस पूरे आयोजन को और अधिक पवित्र, गरिमामय और अविस्मरणीय बना दिया।
उनकी उपस्थिति ने न केवल आयोजन की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए यह अवसर गर्व, सम्मान और आत्मिक आनंद का विषय बन गया।
राज्यपाल की मौजूदगी ने यह भी संदेश दिया कि धर्म, सेवा और समाजहित के ऐसे आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक होते हैं।

 

 

 

अपना घर सेवा समिति ने रचा अनुकरणीय और अविस्मरणीय इतिहास
इस पूरे भव्य, सुव्यवस्थित और समाजहितकारी आयोजन को अपना घर सेवा समिति ने अत्यंत समर्पण, सेवाभाव और संगठनात्मक क्षमता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
समिति ने जिस प्रकार जंगल के बीचों-बीच इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, अतिथियों, संतों, नवविवाहित जोड़ों और ग्रामीणों के लिए भव्य व्यवस्था सुनिश्चित की, वह अपने आप में अत्यंत प्रेरणादायक और प्रशंसनीय रहा।
कथा स्थल की सजावट, विशाल पंडाल, मंचीय व्यवस्था, श्रद्धालुओं के बैठने की सुविधा, भोजन-प्रसाद, आवागमन, विवाह संस्कार, धार्मिक अनुशासन और समग्र आयोजन की गरिमा—हर स्तर पर अपना घर सेवा समिति की मेहनत, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
समिति ने यह सिद्ध कर दिया कि
यदि संकल्प सेवा का हो,
यदि उद्देश्य लोककल्याण का हो,
और यदि भावना सनातन संस्कृति के उत्थान की हो,
तो कोई भी स्थान छोटा नहीं होता और कोई भी आयोजन असंभव नहीं रहता।
मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय और नन्हा महाराज का मिला आध्यात्मिक सहयोग
इस पुण्य और ऐतिहासिक आयोजन में मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय की भी महत्वपूर्ण और प्रेरक भूमिका रही।

 

 

 

उन्होंने धार्मिक गरिमा, वैदिक परंपराओं और आयोजन की आध्यात्मिक पवित्रता को बनाए रखने में विशेष योगदान दिया।
उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक श्रद्धामय तथा संस्कारपूर्ण स्वरूप प्रदान किया।
इसी प्रकार नन्हा महाराज का भी इस आयोजन में विशेष सहयोग, सहभागिता और आध्यात्मिक समर्थन प्राप्त हुआ।
उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन ने पूरे आयोजन में एक विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
नन्हा महाराज के सहयोग से यह आयोजन केवल कथा या सामाजिक कार्यक्रम भर नहीं रहा, बल्कि सनातन आस्था और समाजसेवा के महोत्सव के रूप में स्थापित हुआ।
जंगल के बीचों-बीच उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पंडाल भी पड़ गया छोटा
ग्राम ढपढप जैसे वनांचल क्षेत्र में श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया।
कोरबा जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से हजारों-लाखों श्रद्धालु कथा स्थल तक पहुंचे।
सड़कें, गांव की गलियां, खेत-खलिहान, मार्ग, पार्किंग स्थल, कथा परिसर और आसपास का समूचा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा हुआ दिखाई दिया।
जो लोग पहली बार इस क्षेत्र में पहुंचे, वे यह देखकर चकित रह गए कि जंगलों और ग्रामीण परिवेश के बीच ऐसा विराट, अनुशासित और आध्यात्मिक आयोजन भी संभव है।
स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह दृश्य आश्चर्य, गर्व और आध्यात्मिक उल्लास से भरा हुआ था।
कई गांववासियों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार अपने क्षेत्र में इतना विशाल धार्मिक महासंगम देखा।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण “जय श्रीराम”, “जय बजरंगबली”, “बागेश्वर धाम सरकार की जय” और “सनातन धर्म की जय” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
श्रद्धा और भक्ति की यह धारा जंगल की निस्तब्धता को भी आध्यात्मिक स्पंदन से भरती रही।
108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह बना आयोजन का सबसे पावन अध्याय
इस पांच दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा का सबसे पुण्यदायी, भावुक और ऐतिहासिक क्षण वह रहा, जब 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक रीति-रिवाजों और सामाजिक गरिमा के साथ संपन्न कराया गया।
यह केवल विवाह समारोह नहीं था, बल्कि यह नारी सम्मान, समाजसेवा, धर्म और मानवीय करुणा का जीवंत उत्सव बन गया।
विवाह समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वयं को इस पुण्य कार्य का सहभागी मानते हुए बाराती भी माना और घराती भी।
जिस भाव से पूरे समाज ने इस आयोजन को अपनाया, उसने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एक परिवार की तरह खड़ा हो जाए, तब निर्धनता भी बेटियों की खुशियों में बाधा नहीं बन सकती।
जहां एक ओर बेटियों के हाथ पीले हुए, वहीं दूसरी ओर हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य दृश्य को देखकर अपने भीतर यह अनुभव किया कि सच्चा धर्म वही है, जो किसी के जीवन में आशा, सम्मान और खुशियां लेकर आए।
निर्धन कन्याओं का विवाह क्यों माना जाता है महान पुण्य?
भारतीय सनातन परंपरा में कन्यादान को श्रेष्ठतम दानों में से एक माना गया है।
विशेषकर जब समाज किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग करता है, तब वह केवल एक सामाजिक उत्तरदायित्व नहीं निभाता, बल्कि एक अत्यंत पुण्यदायी और मानवीय कर्तव्य का निर्वहन करता है।
ऐसे सामूहिक विवाह आयोजनों से—
एक बेटी का जीवन सुरक्षित और सम्मानित बनता है
निर्धन परिवारों की चिंता कम होती है
समाज में सहयोग और एकजुटता की भावना बढ़ती है
दहेज, दिखावा और सामाजिक असमानता जैसी कुरीतियों पर चोट पड़ती है
धर्म का व्यवहारिक और लोकहितकारी स्वरूप सामने आता है
ढपढप की धरती पर हुआ 108 निर्धन कन्याओं का विवाह वास्तव में महादान, महापुण्य और लोकसेवा का अद्भुत उदाहरण बन गया, जिसने पूरे क्षेत्र को गर्व और भावुकता से भर दिया।
जंगल की यह धरती अब केवल ग्राम नहीं, तीर्थधाम बन गई
ग्राम ढपढप का यह वनांचल क्षेत्र पहले अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांति और ग्रामीण सादगी के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह स्थान भक्ति, सेवा और सनातन चेतना की नई पहचान बन गया है।
जहां हनुमंत कथा गूंजी हो,
जहां संतों का आशीर्वाद मिला हो,
जहां 108 बेटियों के विवाह संपन्न हुए हों,
जहां राज्यपाल की उपस्थिति में वरमाला का शुभारंभ हुआ हो,
और जहां समाज ने मिलकर सेवा को साधना बना दिया हो—
वह भूमि केवल ग्राम नहीं रहती, वह तीर्थधाम बन जाती है।
श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का मानना रहा कि इस आयोजन के बाद ढपढप की धरती और भी अधिक पवित्र, पूजनीय और पुण्यमयी हो गई है।
अब यह स्थान केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और लोकसेवा का प्रतीक बन चुका है।
श्री बागेश्वर धाम सरकार की कथा ने जगाई भक्ति और सनातन चेतना
पांच दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज की कथा, प्रवचन और आध्यात्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, संस्कार और सनातन चेतना का नया संचार किया।
उनकी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण कथा ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जागृत किया, बल्कि समाज को सेवा, धर्म, संस्कृति, राष्ट्र, नारी सम्मान और आध्यात्मिक जागरण का भी संदेश दिया।
कथा के प्रत्येक दिवस श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती रही और समापन दिवस पर यह जनसैलाब अपने चरम पर दिखाई दिया।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक मंच नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव का केंद्र बन चुका था।
इनकी रही विशेष और प्रेरक भूमिका
इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन को सफल बनाने में अनेक सामाजिक, धार्मिक और जनप्रतिनिधि हस्तियों की अहम भूमिका रही।
विशेष रूप से मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय, राणा मुखर्जी, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, सुबोध सिंह, अमरजीत सिंह, अखिलेश अग्रवाल, विजय राठौर सहित अनेक समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं और धर्मप्रेमियों ने इस आयोजन को सफल, सुव्यवस्थित और गरिमामय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन सभी की सहभागिता ने यह प्रमाणित किया कि जब समाज, धर्म, सेवा और संगठन एक साथ खड़े होते हैं, तब आयोजन केवल सफल नहीं होता—वह इतिहास बन जाता है।
भक्ति, सेवा और संस्कार का अमिट इतिहास रच गया ढपढप
ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में संपन्न यह आयोजन आने वाले समय में कोरबा जिले के सबसे भव्य, सबसे प्रेरक, सबसे पुण्यदायी और सबसे ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाएगा।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि—
जहां सेवा हो,
जहां संतों का आशीर्वाद हो,
जहां बेटियों के जीवन संवरें,
जहां समाज एक परिवार बन जाए,
और जहां सनातन संस्कृति जन-जन को जोड़ दे—
वहीं सच्चे अर्थों में धर्म का वैभव प्रकट होता है।
ढपढप की यह पावन धरती अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार, सनातन एकता और लोककल्याण का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

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