दोषपूर्ण इलेक्ट्रिक स्कूटी मामले में उपभोक्ता आयोग का सख्त आदेश: कमियां दूर करें या पूरी कीमत लौटाएं


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कोरबा की अध्यक्षा श्रीमती रंजना दत्ता द्वारा उपभोक्ता परिवाद क्रमांक DC/383/CC/71/2025 में एक महत्वपूर्ण एवं उपभोक्ता हित में ऐतिहासिक आदेश पारित किया गया है। यह निर्णय उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो दोषपूर्ण उत्पाद और सेवा में कमी के कारण परेशान होते हैं।
प्रकरण में परिवादी मनोज शर्मा ने स्थानीय विक्रेता ओम ई सर्विसेज (प्रोपराइटर चंद्रकला साहू) तथा निर्माता कंपनी कर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत किया था। परिवादी का आरोप था कि खरीदी गई इलेक्ट्रिक स्कूटी में प्रारंभ से ही तकनीकी खामियां उत्पन्न हो रही थीं, जिसके कारण वाहन का समुचित उपयोग संभव नहीं हो पा रहा था। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ता को मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
माननीय आयोग ने प्रस्तुत दस्तावेजों, साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तृत विचार-विमर्श करने के पश्चात परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने विरोधी पक्ष क्रमांक-02 को निर्देशित किया कि वाहन में पाई गई सभी कमियों को दूर कर उसे पूर्णतः कार्यशील एवं संतोषजनक स्थिति में परिवादी को सौंपा जाए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन निर्धारित समयावधि में नहीं किया गया, तो विरोधी पक्ष को वाहन की संपूर्ण मूल्य राशि परिवादी को भुगतान करनी होगी। साथ ही, निर्धारित अतिरिक्त राशि का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।
इसके अतिरिक्त आयोग ने परिवादी को वाद व्यय के रूप में ₹5,000/- प्रदान करने का आदेश पारित किया, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि उपभोक्ता को न्याय पाने में हुए खर्च की भी भरपाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रकरण में परिवादी की ओर से अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने प्रभावी एवं सशक्त पैरवी करते हुए आयोग के समक्ष तथ्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया। उनके तार्किक एवं विधिक पक्ष के आधार पर आयोग ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सशक्त उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। आयोग का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि दोषपूर्ण वस्तु अथवा सेवा में कमी की स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रभावी राहत प्राप्त की जा सकती है और लापरवाही बरतने वाले विक्रेता या निर्माता को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

