नारी सम्मान से राष्ट्र की एकता तक, सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प : रूप कुमारी चौधरी
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12 करोड़ से अधिक शौचालय, 10.56 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन और करोड़ों पक्के आवासों का उल्लेख कर महिला सशक्तीकरण पर रखे विचार, कांग्रेस पर भी साधा निशाना
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महासमुंद लोकसभा सांसद रूप कुमारी चौधरी ने महिला सम्मान, गरीब परिवारों के स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता को सशक्त भारत की बुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को सम्मानजनक जीवन मिले, गरीब परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों और देश की सांस्कृतिक विरासत तथा सामाजिक एकता सुरक्षित रहे।
रूप कुमारी चौधरी ने केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण हुआ है। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सितंबर 2026 तक 10.56 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत अगस्त 2026 तक लगभग 3.12 करोड़ आवास पूर्ण होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि शौचालय, पक्का मकान और स्वच्छ ईंधन केवल सरकारी योजनाओं के आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं के सम्मानजनक जीवन और गरीब परिवारों की बेहतर जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण कदम हैं। खुले में शौच की मजबूरी से महिलाओं को होने वाली परेशानियों और स्वच्छ ईंधन के अभाव में सामने आने वाली कठिनाइयों को समझना जरूरी है। इन सुविधाओं का विस्तार महिलाओं को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
महिला सम्मान और गरीबों के स्वाभिमान को बताया विकास का आधार
कांग्रेस पर राजनीतिक निशाना साधते हुए रूप कुमारी चौधरी ने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस सरकारों ने महिलाओं की बुनियादी जरूरतों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा कि जब गरीब परिवारों को आवास, स्वच्छता और रसोई गैस जैसी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, तब विपक्ष को जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि है और राजनीतिक दलों को जनादेश के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने संविधान की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान किसी व्यक्ति या परिवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर है। उसका मूल उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, न्याय और सम्मान प्रदान करना है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इसी में है कि आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिले।
भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर
रूप कुमारी चौधरी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सभ्यता, संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक परंपराएं उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत ने अपने इतिहास में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और उसकी सांस्कृतिक जड़ें आज भी समाज को जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने विदेशी वित्तपोषण और बाहरी हस्तक्षेप से जुड़े मुद्दों पर कहा कि यदि देश में अराजकता फैलाने, सामाजिक विभाजन बढ़ाने या राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप को बिना जांच के अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन देश की संप्रभुता, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, लेकिन संवैधानिक मर्यादा भी जरूरी
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है। हालांकि, विरोध लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए। हिंसा और अराजकता से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है, इसलिए सभी पक्षों को संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सशक्त भारत का निर्माण केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, महिला सशक्तीकरण, गरीबों के सम्मान और राष्ट्रीय एकता से भी होता है। महिलाओं को समान अवसर, जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी सुविधाएं और प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए।
रूप कुमारी चौधरी ने अपने विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि नारी का सम्मान, गरीबों का स्वाभिमान और राष्ट्र की एकता—इन तीनों को मजबूत किए बिना विकसित और सशक्त भारत की कल्पना अधूरी है। देश की सांस्कृतिक पहचान, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक एकजुटता को सुरक्षित रखते हुए विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
