पुणे की राष्ट्रीय कार्यशाला में गूंजी कोरबा के साक्षरता अभियान की बात, जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने किया प्रतिनिधित्व
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2027 तक सभी असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य, विद्यार्थियों को भी अभियान से जोड़कर दी जा रही है जिम्मेदारी; बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक से प्रोत्साहन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। उल्लास–नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और साक्षरता संबंधी शोध निष्कर्षों के विश्लेषण को लेकर महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कोरबा जिले की जिला परियोजना अधिकारी श्रीमती ज्योति शर्मा ने सहभागिता की। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली के निर्देशानुसार 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के साक्षरता संबंधी आंकड़ों, शोध अध्ययनों और रिपोर्ट को अंतिम रूप देने पर कार्य किया गया।
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में श्रीमती ज्योति शर्मा का चयन कोरबा जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य साक्षरता से जुड़े शोध निष्कर्षों और आंकड़ों का विश्लेषण करना तथा राज्य स्तरीय जानकारी के आधार पर रिपोर्ट को अंतिम रूप देना था। इस दौरान कोरबा जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में संचालित साक्षरता संबंधी कार्यों और प्रगति को भी प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई।

2027 तक असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य
उल्लास–नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में असाक्षर व्यक्तियों का पंजीयन कर उन्हें पढ़ने-लिखने और बुनियादी शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। अभियान का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पंजीकृत असाक्षरों को साक्षर बनाने की दिशा में ठोस प्रगति हासिल करना है।
विद्यार्थियों को भी बनाया जा रहा साक्षरता अभियान का भागीदार
इस अभियान की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर दिया जा रहा है। कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को असाक्षर व्यक्तियों को पढ़ाने के कार्य से जोड़ा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों द्वारा 10 असाक्षर व्यक्तियों को पढ़ाने पर बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक देने का प्रावधान किया गया है। इससे विद्यार्थियों में साक्षरता अभियान के प्रति उत्साह बढ़ाने और समाज के वंचित वर्गों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले वर्ष भी छत्तीसगढ़ में दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के हजारों विद्यार्थियों को इस पहल के तहत प्रोत्साहित किए जाने की जानकारी दी गई है। विद्यार्थियों की भागीदारी से साक्षरता अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप मिल रहा है और शिक्षा के महत्व को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्यशाला में सहभागिता के बाद श्रीमती ज्योति शर्मा ने बताया कि साक्षरता अभियान के अंतर्गत असाक्षर व्यक्तियों की प्रविष्टि और उन्हें शिक्षित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को अक्षर ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में पढ़ने-लिखने और बुनियादी जानकारी का उपयोग करने में सक्षम बनाना भी है।
जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण, कोरबा के माध्यम से संचालित इन प्रयासों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय कार्यशाला में कोरबा जिले का प्रतिनिधित्व साक्षरता संबंधी कार्यों की प्रगति, अनुभवों और चुनौतियों को व्यापक स्तर पर साझा करने का अवसर बना।
