गुजरात निकाय चुनावों में भाजपा की जीत पर अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार, बोले—‘जनता के जनादेश को SIR के बहाने नकारना बंद करे कांग्रेस’
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गांधीनगर में भाजपा की 44 में से 38 सीटों पर जीत का दावा, अमित शाह ने कांग्रेस को दी आत्ममंथन की नसीहत; 2029 में एनडीए की प्रचंड जीत का भी जताया भरोसा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// गांधीनगर/नई दिल्ली गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने चुनावी परिणामों को भाजपा के प्रति जनता के समर्थन का संकेत बताते हुए कहा कि कांग्रेस को हर हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति और जनता के बीच स्वीकार्यता पर आत्ममंथन करना चाहिए। अमित शाह ने विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावी नतीजों को केवल एसआईआर से जोड़कर भाजपा की लोकप्रियता को खारिज नहीं किया जा सकता।
अमित शाह के अनुसार, गुजरात में तीन स्थानीय निकायों के चुनावों में भाजपा ने 104 सीटों में से 90 सीटों पर जीत हासिल की। उन्होंने गांधीनगर नगर निगम का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां भाजपा ने 44 में से 38 सीटों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की और दावा किया कि पार्टी के सभी 32 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। शाह ने इन परिणामों को गुजरात के मतदाताओं के रुझान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन से जोड़कर पेश किया।
‘चुनावी हार का कारण तलाशे कांग्रेस, प्रक्रिया पर आरोप लगाना समाधान नहीं’
केंद्रीय गृह मंत्री ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। यदि कोई राजनीतिक दल लगातार चुनावों में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है, तो उसे अपने संगठन, नीतियों, जनसंपर्क और राजनीतिक दृष्टिकोण की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक कमजोरियों से ध्यान हटाने का प्रयास करती है।
शाह ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को विभिन्न राज्यों में स्थानीय निकायों तथा उपचुनावों में मिले समर्थन को जनता के विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत दी कि वह चुनाव परिणामों से सबक लेकर जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे।
एसआईआर पर सियासी टकराव और तेज
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक विवाद पर अमित शाह ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर के मुद्दे को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं और घुसपैठियों के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख सवालों के घेरे में है।
शाह ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। वहीं, एसआईआर को लेकर उठने वाले सवालों का मूल्यांकन संबंधित निर्वाचन नियमों, दस्तावेजों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। इस मुद्दे ने चुनावी राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक तथा राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है।
2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी किया बड़ा दावा
अमित शाह ने आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर विश्वास जताया कि वर्ष 2029 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए को जनता का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने लगातार चुनावी पराजयों का मुद्दा उठाया और राहुल गांधी से राजनीतिक आत्मचिंतन करने की अपील की।
शाह के इस बयान को भाजपा की ओर से आगामी चुनावों की राजनीतिक दिशा और विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, वर्ष 2029 के चुनाव परिणामों को लेकर उनका वक्तव्य एक राजनीतिक दावा है, न कि चुनावी परिणाम का पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष।
जनादेश की व्याख्या को लेकर आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और जनसमर्थन को लेकर चल रही बहस को नया राजनीतिक आयाम दिया है। अमित शाह ने जहां भाजपा की जीत को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के प्रति समर्थन बताया, वहीं एसआईआर को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। इस पूरे विवाद में चुनाव परिणामों के आधिकारिक आंकड़े, निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और राजनीतिक दलों के दावे महत्वपूर्ण रहेंगे।
अमित शाह का स्पष्ट संदेश है कि कांग्रेस को चुनावी परिणामों से सबक लेकर अपनी रणनीति पर विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े किसी भी विवाद का निष्पक्ष आकलन तथ्यों तथा आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
