मतदाता सूची पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने दावों का जवाब दे : भाजपा
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डॉ. विजयशंकर मिश्रा का हमला—दावा-आपत्ति का अवसर रहते चुप्पी क्यों, प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाने का क्या औचित्य?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// रायपुर। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर और कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि निर्धारित प्रक्रिया के दौरान आपत्ति दर्ज कराने के अवसर का उपयोग करने के बजाय अब निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने दावों और निर्धारित समयसीमा के दौरान उठाए गए कदमों का जवाब देना चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है। भाजपा का दावा है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान स्थानांतरित, अनुपस्थित और अन्य श्रेणियों में रखे गए मतदाताओं से संबंधित सूचियां जिला, विधानसभा और बूथ स्तर पर उपलब्ध कराई गई थीं। उनके अनुसार, संबंधित सूचियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका तथा दस्तावेजों में दर्ज सहमति इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण है। भाजपा ने दावा किया है कि सूची स्वीकार किए जाने से संबंधित अभिलेख निर्वाचन तंत्र के पास उपलब्ध हैं।
‘समय पर आपत्ति नहीं, अब सवाल क्यों?’
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर को लेकर सवाल उठाया कि जब दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित समय दिया गया था, तब उन्होंने उस अवधि में अपनी आपत्तियां क्यों नहीं उठाईं? डॉ. मिश्रा ने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया पर वास्तविक आपत्ति थी, तो उसे नियमानुसार और निर्धारित समय के भीतर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष रखा जाना चाहिए था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने समय रहते उपलब्ध अवसर का किस प्रकार उपयोग किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के मुद्दे को राजनीतिक बहस का विषय बनाकर जनता के बीच संदेह पैदा कर रही है। भाजपा के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्धारित नियमों का पालन और उपलब्ध कानूनी उपायों का समय पर उपयोग आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर बहस, दस्तावेजों की भूमिका अहम
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली पर लगाए जाने वाले आरोप तथ्यों तथा दस्तावेजों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उससे संबंधित विशिष्ट तथ्यों और प्रमाणों को सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा करते समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संबंधित अभिलेखों, आपत्तियों और निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष उपलब्ध तथ्यों पर बात होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि केवल बयानबाजी से किसी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।
भाजपा का पलटवार—जनता को भ्रमित करने के बजाय तथ्यों पर बात करे कांग्रेस
डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी चुनावी या प्रशासनिक प्रक्रिया में खामियों की शिकायत करने का अधिकार सभी संबंधित पक्षों को है, लेकिन ऐसे आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन के पक्ष में है। कांग्रेस को भी यदि मतदाता सूची से संबंधित कोई गंभीर शिकायत है, तो उसे संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के साथ उचित मंच पर उठाना चाहिए।
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर जारी इस राजनीतिक विवाद में अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया, बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की स्थिति चर्चा के केंद्र में है। भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक कदम बताया है, जबकि पूरे मामले में वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित निर्वाचन अभिलेखों और आधिकारिक पक्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
