राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में कल माता रानी के आगमन के साथ गूंजेगी डांडिया की थाप, भक्ति और उल्लास से सजेगी शाम
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पूजा-अर्चना और माता रानी की आरती से होगा शुभारंभ, गरबा-डांडिया के रंग में रंगेंगे बच्चे, युवा और बुजुर्ग; परिवार सहित उत्सव में शामिल होने का आमंत्रण
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। नवरात्रि का पर्व यानी माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और खुशियों के रंगों में सराबोर होने का पावन अवसर। इसी उत्साह और भक्तिमय वातावरण में राजेंद्र प्रसाद नगर फेज-1 में कल शाम माता रानी के आगमन के साथ पूजा-अर्चना और आरती कर डांडिया महोत्सव का शुभारंभ किया जाएगा। रोशनी से सजे आयोजन स्थल, माँ के जयकारों और डांडिया की थाप के बीच यह शाम भक्ति, संस्कृति और सामूहिक उल्लास का सुंदर संगम बनेगी।
यह आयोजन केवल नृत्य और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों को एक साथ लाने, बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और समाज में आपसी प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का अवसर भी है। बच्चे हों या युवा, महिलाएं हों या बुजुर्ग—हर पीढ़ी अपनी भागीदारी से इस उत्सव को खास बना सकती है।
विधि-विधान से होगी माता रानी की पूजा-अर्चना
माता रानी के स्वागत के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई कर प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फूल, रोली, अक्षत, कुमकुम, चुनरी, नारियल, फल, मिठाई, धूप और दीप अर्पित कर सकते हैं। गणेश जी का स्मरण करने के बाद माँ दुर्गा की स्तुति, दुर्गा चालीसा या मंत्रों का पाठ किया जा सकता है।
इसके बाद सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न होगी। श्रद्धालु माँ दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और समाज की खुशहाली की कामना करेंगे। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है सच्ची श्रद्धा, पवित्रता और सकारात्मक भाव।
परिवार के साथ पूजा, बच्चों को मिलेंगे संस्कार
नवरात्रि परिवार को एक साथ जोड़ने वाला पर्व है। जब बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ आरती करते हैं, तो वे धार्मिक परंपराओं के साथ सम्मान, सहयोग और पारिवारिक एकता का महत्व भी सीखते हैं। बुजुर्ग बच्चों को माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा बता सकते हैं, जबकि युवा आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर सकते हैं।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप साहस, तप, धैर्य, करुणा, शक्ति, वात्सल्य, पवित्रता और ज्ञान की प्रेरणा देते हैं। नवरात्रि हमें सिखाती है कि बुराई पर अच्छाई की विजय के साथ समाज में नारी सम्मान, सेवा और सद्भाव को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
डांडिया-गरबा की थाप पर झूमेगा पूरा उत्सव
पूजा-अर्चना के बाद डांडिया और गरबा की रंगीन प्रस्तुतियां उत्सव में नई उमंग भरेंगी। पारंपरिक परिधानों की छटा, संगीत की मधुर धुन और डांडिया की लयबद्ध ताल वातावरण को उत्साह से भर देगी। गरबा और डांडिया भारतीय लोकसंस्कृति की ऐसी परंपराएं हैं, जो सामूहिक भागीदारी और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती हैं।
बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने, युवाओं को संस्कृति से जुड़ने और बुजुर्गों को परिवार व समाज के साथ आनंद के पल बिताने का अवसर मिलेगा। इस तरह आयोजन मनोरंजन के साथ संस्कारों और सामाजिक मेलजोल का माध्यम भी बनेगा।
भक्ति, सम्मान और एकता का संदेश
नवरात्रि का वास्तविक संदेश माँ दुर्गा की आराधना के साथ नारी सम्मान, आपसी सहयोग और समाज में सद्भाव को मजबूत करना है। आयोजन में सभी लोग एक-दूसरे की सुविधा और सम्मान का ध्यान रखें, परिसर को स्वच्छ बनाए रखें तथा बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में कल शाम माता रानी के आगमन के साथ शुरू होने वाला डांडिया महोत्सव श्रद्धा और उल्लास का यादगार अवसर बनेगा। माँ के जयकारों से गूंजता वातावरण और डांडिया की थाप लोगों को भक्ति एवं संस्कृति के रंग में रंगने के लिए तैयार है।
आइए, परिवार सहित माता रानी के स्वागत में शामिल हों, पूजा-अर्चना और आरती करें तथा डांडिया-गरबा के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं का उत्सव मनाएं।
जय माता दी!
