October 10, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

नवरात्रि की झांकियों में जीवित सांपों का प्रदर्शन पड़ा भारी तो होगी कानूनी कार्रवाई! जितेंद्र सारथी की दोटूक अपील—नियम तोड़ने वालों पर हो सख्त कार्रवाई

1 min read

 

 

 

धार्मिक आयोजनों में वन्यजीवों का इस्तेमाल रोकने की मांग, आयोजक समितियां रहें सतर्क; कृत्रिम सांपों से करें आकर्षक प्रस्तुतियां, आस्था के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी जरूरी

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। नवरात्रि की झांकियों, डांस प्रतियोगिताओं और धार्मिक आयोजनों में यदि जीवित सांपों का प्रदर्शन किया जा रहा है, तो यह वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। धार्मिक आस्था की आड़ में बेजुबान वन्यजीवों को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम ‘नोवा नेचर’ के प्रमुख जितेंद्र सारथी ने जिले की सभी आयोजन समितियों से जीवित सांपों का प्रदर्शन नहीं कराने की अपील की है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने सहित कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

 

 

सांपों का प्रदर्शन मनोरंजन नहीं, वन्यजीव संरक्षण का गंभीर सवाल

जितेंद्र सारथी ने कहा कि नवरात्रि श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक संस्कृति का पर्व है। इस दौरान आयोजित झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जीवित सांपों को शामिल करना सांपों और आम नागरिकों, दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। भीड़भाड़ के बीच वन्यजीवों को लाना उनकी सुरक्षा और प्राकृतिक व्यवहार के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

उन्होंने आयोजन समितियों से आग्रह किया कि बाहर से बुलाए जाने वाले कलाकारों या अन्य व्यक्तियों को भी जीवित सांपों के साथ नृत्य, करतब अथवा प्रदर्शन करने की अनुमति न दी जाए। यदि किसी कार्यक्रम में ऐसा मामला सामने आता है, तो संबंधित विभाग को इसकी जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन हुआ तो हो सकती है एफआईआर

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सांपों की विभिन्न प्रजातियां संरक्षित हैं। उनकी प्रजाति और गतिविधि के अनुसार पकड़ने, रखने, इस्तेमाल करने या अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अधिनियम की धारा 9 संरक्षित वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाती है, जबकि धारा 51 में कानून के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान है। हालांकि, किसी विशेष आयोजन में अपराध बना है या नहीं, यह संबंधित तथ्य, सांप की प्रजाति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगा।

जितेंद्र सारथी की मांग है कि ऐसे मामलों को हल्के में न लिया जाए। यदि जांच में कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

 

आस्था भी सुरक्षित, वन्यजीव भी सुरक्षित

जितेंद्र सारथी ने स्पष्ट किया कि उनकी अपील किसी धर्म, परंपरा या श्रद्धालुओं की भावनाओं के विरुद्ध नहीं है। भगवान शिव और नागों के प्रति श्रद्धा भारतीय धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन श्रद्धा व्यक्त करने के लिए जीवित सांपों को प्रदर्शन में शामिल करना आवश्यक नहीं है। समितियां कृत्रिम सांपों, आकर्षक प्रतिकृतियों और कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी भव्य झांकियां तैयार कर सकती हैं।

समितियों से अपील—नियमों का पालन करें, जिम्मेदार आयोजन करें

जितेंद्र सारथी ने जिले की सभी दुर्गा उत्सव समितियों, सांस्कृतिक आयोजकों और डांस प्रतियोगिता संचालकों से अपील की कि वे नवरात्रि की पवित्रता, जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दें। जीवित सांपों का प्रदर्शन कराने के बजाय सुरक्षित और कलात्मक विकल्प अपनाएं। उनका कहना है कि धार्मिक उत्सवों की भव्यता तभी सार्थक है, जब उसमें किसी बेजुबान जीव को अनावश्यक जोखिम में न डाला जाए।

संदेश स्पष्ट है—आस्था का सम्मान हो, वन्यजीवों की सुरक्षा हो और कानून का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.