September 20, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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जर्जर और खदान क्षेत्र के समीप स्थित भवनों को हटाने से पहले पटवारी कार्यालय, आंगनबाड़ी, छात्रावास और स्वास्थ्य सेवाओं की बनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। हरदीबाजार तहसील के ग्राम अमगांव में एसईसीएल द्वारा शासकीय भवनों को कथित रूप से जबरन तोड़े जाने को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इसका खंडन किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी संचालित शासकीय कार्यालय या संस्था को बलपूर्वक हटाकर भवन नहीं तोड़े गए, बल्कि संबंधित संस्थानों को कार्रवाई से पहले ही वैकल्पिक एवं सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा चुका था।

 

 

जिला प्रशासन के अनुसार अमगांव में खदान क्षेत्र के समीप स्थित पटवारी कार्यालय, आंगनबाड़ी भवन और छात्रावास पहले से जर्जर अवस्था में थे। खदान क्षेत्र की निकटता को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन संस्थानों को भवन हटाने की कार्रवाई से पहले ही अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया था। पटवारी कार्यालय को करीब दो माह पहले तहसील कार्यालय में स्थानांतरित किया जा चुका था, जबकि आंगनबाड़ी केंद्र और छात्रावास के लिए भी वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था कर दी गई थी।
स्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी प्रशासन ने स्थिति साफ की है। प्रशासन के मुताबिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी खदान क्षेत्र के समीप होने के कारण सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाना आवश्यक था। संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस संबंध में पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था। इसके बाद भवनों को हटाने की कार्रवाई से करीब दो दिन पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से जारी हैं। वहीं आंगनबाड़ी और छात्रावास का संचालन भी किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी संचालित संस्था को अचानक बंद कराकर या जबरन हटाकर भवन गिराने की कार्रवाई नहीं की गई।
खदान विस्तार और सुरक्षा को बताया कार्रवाई का आधार
जिला प्रशासन के मुताबिक अमगांव में भवनों को हटाने की कार्रवाई के पीछे खदान क्षेत्र का विस्तार, सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां और भवनों की जर्जर स्थिति प्रमुख कारण रहे। प्रशासन का कहना है कि संबंधित शासकीय संस्थानों को पहले ही सुरक्षित वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरित करने के बाद एसईसीएल द्वारा जिला प्रशासन के समन्वय एवं सहयोग से निष्प्रयोज्य और जर्जर भवनों को हटाया गया।
इस स्पष्टीकरण के साथ प्रशासन ने उन खबरों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है, जिनमें किसी संचालित शासकीय कार्यालय अथवा संस्था को जबरन या बलपूर्वक तोड़े जाने की बात कही गई थी।
ग्रामीणों के मुद्दों पर भी प्रशासन की नजर
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरदीबाजार सहित खदान प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की रोजगार, पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर एसईसीएल प्रबंधन के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। ग्रामीणों से जुड़े विषयों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने की बात भी प्रशासन ने कही है।
अमगांव में सामने आए पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष अब स्पष्ट है—पहले संस्थानों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण, उसके बाद जर्जर एवं निष्प्रयोज्य भवनों को हटाने की कार्रवाई। प्रशासन के इस स्पष्टीकरण के बाद भवनों को जबरन तोड़े जाने संबंधी आरोपों को लेकर स्थिति को इसी आधिकारिक पक्ष के संदर्भ में देखा जाना होगा।

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