घर-घर गूंजा ‘हर-हर महादेव’: सावन सोमवार पर शिवलिंग का दिव्य अभिषेक, फूलों और दीपों से सजे पूजा स्थल
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मंदिरों के साथ घरों में भी श्रद्धा से हुआ जल, दूध और पंचामृत अभिषेक; बच्चों से बुजुर्गों तक परिवार ने मिलकर की शिव आराधना
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सावन सोमवार का पावन दिन आते ही शहर से लेकर गांवों तक वातावरण शिवमय नजर आया। मंदिरों में जहां विशेष पूजा-अर्चना और आकर्षक श्रृंगार किया गया, वहीं बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने घरों में भी भगवान शिव की आराधना कर शिवलिंग का अभिषेक किया। सुबह पूजा स्थल की सफाई के बाद दीप प्रज्वलित किए गए और परिवार के सदस्यों ने मिलकर भगवान शिव को जल अर्पित कर सुख-शांति एवं परिवार के मंगल की प्रार्थना की।
घर के पूजा स्थल पर सजा छोटा-सा शिवालय
कई परिवारों ने घर के पूजा स्थल को फूलों, बेलपत्र, आम और अशोक के पत्तों, दीपों तथा आकर्षक सजावटी सामग्री से सजाया। शिवलिंग को स्वच्छ जल से स्नान कराने के बाद श्रद्धानुसार विभिन्न सामग्रियों से अभिषेक किया गया।
जहां संभव हो, परिवारों ने पूजा के दौरान घर के बच्चों को भी साथ शामिल किया। बच्चों ने फूल और बेलपत्र अर्पित किए, दीप जलाए और भगवान शिव के जयकारे लगाए। इससे घर का वातावरण धार्मिक होने के साथ पारिवारिक एकता और संस्कारों से भी जुड़ा नजर आया।
घर पर कैसे किया गया अभिषेक?

परिवारों ने अपनी परंपरा और उपलब्ध सामग्री के अनुसार अभिषेक किया। सामान्य रूप से स्वच्छ जल, गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक किया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया जाता है।
इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर बेलपत्र, पुष्प, फल और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाई गई। कई घरों में भगवान शिव को भोग लगाकर आरती की गई और परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर प्रार्थना की।
ध्यान रखने योग्य बात यह है कि अभिषेक की सामग्री और विधि परिवार तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। घर पर पूजा करते समय स्वच्छता और सरल, श्रद्धापूर्ण विधि को प्राथमिकता देना पर्याप्त है।
बच्चों के लिए पूजा बनी संस्कारों की पाठशाला
सावन सोमवार की सबसे सुंदर तस्वीर घरों में तब दिखाई दी जब माता-पिता और दादा-दादी ने बच्चों को पूजा में शामिल किया। बच्चों को बताया गया कि बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है, दीप क्यों जलाया जाता है और भगवान शिव की आराधना में संयम, करुणा एवं सरलता का क्या महत्व है।
इस तरह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान न रहकर नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों से जोड़ने का अवसर बन गई।
फूलों और दीपों से हुआ मनमोहक श्रृंगार
घर के पूजा स्थलों पर फूलों की मालाएं, पत्तियों की सजावट और दीपों की रोशनी ने विशेष आकर्षण पैदा किया। कई परिवारों ने शिवलिंग के आसपास फूलों से सुंदर आकृतियां बनाईं और पूजा स्थल को प्राकृतिक सामग्री से सजाया।
दीपक की रोशनी, धूप की सुगंध और शिव मंत्रों के जाप के बीच घरों में ऐसा वातावरण बना मानो छोटा-सा शिवधाम ही साकार हो गया हो।
अभिषेक का धार्मिक भाव क्या है?
सावन में शिव अभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा शांति, सद्बुद्धि, परिवार के मंगल और सकारात्मकता की कामना से की जाती है।
लेकिन पूजा का सबसे बड़ा आधार श्रद्धा और अच्छे कर्म हैं। किसी विशेष सामग्री को चढ़ाना अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्धता के अनुसार स्वच्छ जल और श्रद्धापूर्वक पूजा भी पर्याप्त है।
मंदिर से घर तक शिवभक्ति का एक ही संदेश
सावन सोमवार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भगवान शिव की आराधना केवल बड़े मंदिरों तक सीमित नहीं है। जहां श्रद्धा है, वहीं शिव आराधना का भाव है।
किसी ने मंदिर में अभिषेक किया तो किसी ने घर के पूजा स्थल पर; किसी ने फूलों से श्रृंगार किया तो किसी ने दीपों से सजाया। लेकिन हर जगह एक ही भावना दिखाई दी—परिवार में सुख-शांति रहे, बच्चों को अच्छे संस्कार मिलें और सभी के जीवन में मंगल हो।
मंदिरों में सजे शिवालय और घर-घर में हुए अभिषेक ने सावन सोमवार को भक्ति, संस्कार और पारिवारिक एकता का ऐसा पर्व बना दिया, जहां हर आंगन से एक ही स्वर सुनाई दिया—‘हर-हर महादेव!’







