पुराने वीडियो को 15 अगस्त का बताकर ‘झूठ की राजनीति’! कांग्रेस के दुष्प्रचार पर भाजपा का करारा पलटवार, FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
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कुरुद के 22 मार्च के कार्यक्रम का वीडियो स्वतंत्रता दिवस से जोड़ने का आरोप — भाजपा ने कहा, राष्ट्रीय पर्व की गरिमा से खिलवाड़ और जनता को गुमराह करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व की गरिमा से जुड़े एक वीडियो को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेताओं और सोशल मीडिया से जुड़े कुछ हैंडल्स पर पुराने वीडियो को 15 अगस्त 2026 का बताकर भ्रामक तरीके से प्रचारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर भाजपा प्रतिनिधिमंडल सोमवार को सिविल लाइंस पुलिस थाना पहुंचा और लिखित शिकायत सौंपते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच की मांग की।
भाजपा का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए फोटो और वीडियो वास्तव में 22 मार्च 2026 को धमतरी जिले के कुरुद में आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ से संबंधित हैं, लेकिन उन्हें कथित तौर पर स्वतंत्रता दिवस के दिन का बताकर इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे यह भ्रम पैदा हो कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय ध्वज के स्थान पर पार्टी का झंडा फहराया।

‘पुराने वीडियो को नया रंग देने’ पर भाजपा का सीधा हमला
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर तथा एक्स हैंडल @GenZ_of_India का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संबंधित सामग्री को गलत संदर्भ में प्रसारित किया गया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी पुराने कार्यक्रम के वीडियो को काट-छांटकर अथवा उसके वास्तविक संदर्भ को हटाकर राष्ट्रीय पर्व से जोड़ना महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जनता के बीच गलत धारणा बनाने का गंभीर प्रयास है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रकार के पोस्ट से राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने और समाज में भ्रम एवं तनाव उत्पन्न करने की कोशिश की गई।
थाने पहुंची भाजपा, कहा—सिर्फ पोस्ट हटाना नहीं, पूरी साजिश की जांच हो
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से मांग की कि मामले में केवल सोशल मीडिया पोस्ट की जांच तक सीमित न रहते हुए उसके मूल स्रोत, डिजिटल साक्ष्य, मेटाडेटा, अपलोडिंग विवरण और प्रसारण की पूरी श्रृंखला की तकनीकी जांच की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स से सामग्री प्रसारित हुई, उनके संबंध में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए और यह पता लगाया जाए कि वीडियो सबसे पहले किसने प्रसारित किया तथा उसके बाद वह किन-किन माध्यमों से आगे फैलाया गया।
भाजपा ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2), 196, 197 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C के तहत कार्रवाई की मांग भी रखी है।
भाजपा का आरोप—‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भ्रम फैलाना स्वीकार नहीं’
भाजपा नेताओं ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय पर्व और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े विषयों पर गलत सूचना फैलाकर जनता को भ्रमित करना गंभीर विषय है। पार्टी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन उसके नाम पर जानबूझकर गलत संदर्भ में सामग्री प्रस्तुत कर सामाजिक और राजनीतिक तनाव पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष, त्वरित और तकनीकी रूप से सक्षम जांच करते हुए दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की।
सिविल लाइंस थाने पहुंचा भाजपा का प्रतिनिधिमंडल
शिकायत सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक, डॉ. किरण बघेल, राजीव चक्रवर्ती, प्रदेश मीडिया सह संयोजक राहुल राय, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष कृतिका जैन, भाजयुमो जिला अध्यक्ष अर्पित सूर्यवंशी, किसान मोर्चा उपाध्यक्ष राहुल राव तथा युवा मोर्चा मीडिया प्रभारी वासु शर्मा शामिल रहे।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में भाजपा की शिकायत के बाद अब पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की सच्चाई, वीडियो का वास्तविक समय-संदर्भ और उसे प्रसारित करने वालों की भूमिका तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सामने लाई जाए।
भाजपा का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय पर्वों और संवेदनशील विषयों से जुड़ी भ्रामक सामग्री के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश पर रोक लगाई जा सके।
अब मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर पुलिस की जांच की चौखट पर पहुंच गया है—और सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में पुराने वीडियो के वास्तविक संदर्भ और उसके कथित नए राजनीतिक इस्तेमाल की तस्वीर कितनी स्पष्ट होकर सामने आती है।







