50 किमी दूर के युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता? उरगा पावर प्लांट के विज्ञापन पर स्थानीय बेरोजगारों में उठे सवाल
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा/उरगा। उरगा स्थित लैंको/अडानी पावर प्लांट से जुड़े एक कथित सिक्योरिटी गार्ड भर्ती विज्ञापन को लेकर स्थानीय बेरोजगार युवाओं और प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी सामने आई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित भर्ती पोस्टर में प्लांट से 50 किलोमीटर दूर के उम्मीदवारों को भर्ती के लिए पात्र बताए जाने का दावा किया गया है। इस शर्त को लेकर अब स्थानीय स्तर पर रोजगार में प्राथमिकता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
📍 भर्ती शर्त बनी चर्चा का विषय
प्रसारित विज्ञापन के अनुसार सिक्योरिटी गार्ड पद के लिए भर्ती वर्ष 2026 का उल्लेख है। इसमें वेतन ₹12,200 के साथ PF, ESI, यूनिफॉर्म और रहने की सुविधा जैसी जानकारियां दी गई हैं। भर्ती से जुड़ी कंपनी के तौर पर ‘प्रिंसिपल सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसेज लिमिटेड’ का नाम सामने आ रहा है।
सबसे अधिक चर्चा विज्ञापन में बताई गई 50 किलोमीटर दूरी संबंधी शर्त को लेकर है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि यह शर्त आधिकारिक रूप से लागू की गई है, तो प्लांट के आसपास रहने वाले बेरोजगार उम्मीदवारों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है।
🏭 प्रभावित क्षेत्र के युवाओं ने उठाया रोजगार का सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं का कहना है कि औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार एवं अवसरों को लेकर लंबे समय से उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलता है, तो इससे असंतोष स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि “जब उद्योग क्षेत्र में स्थापित है और उसका प्रभाव स्थानीय क्षेत्र पर पड़ता है, तो रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को उचित प्राथमिकता क्यों नहीं मिलनी चाहिए?”
⚠️ आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
इस मामले में स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्थानीय युवाओं को जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में भर्ती कंपनी और प्लांट प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि विज्ञापन में 50 किलोमीटर की शर्त वास्तव में लागू की गई है, तो इसके आधार, उद्देश्य और स्थानीय उम्मीदवारों को इससे बाहर रखने के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए—ऐसी मांग स्थानीय युवाओं की ओर से उठ रही है।
📢 प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय युवाओं एवं प्रभावित ग्रामीणों ने मामले में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित श्रम विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा पात्र स्थानीय युवाओं को भी समान अवसर मिले।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल भर्ती विज्ञापन से उठकर स्थानीय रोजगार के अधिकार और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी के बड़े सवाल तक पहुंच गया है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनी और प्लांट प्रबंधन इस भर्ती शर्त को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
स्थानीय युवाओं की मांग स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो, नियम सार्वजनिक हों और रोजगार के अवसरों में स्थानीय उम्मीदवारों के हितों की अनदेखी न हो।


