“कोर्ट का हथौड़ा गिरते ही गरजा कुर्मी समाज!” — अवैध कब्जा, स्कूल संचालन और तोड़फोड़ पर बड़ा बवाल, प्रशासन से आर-पार की चेतावनी



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//*** //कोरबा/बिलासपुर
वर्षों तक न्यायालयों में चले संघर्ष के बाद अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। 09 फरवरी 2026 को राजस्व न्यायालय और 20 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट से लगातार अनुकूल फैसले आने के बाद कुर्मी क्षत्रिय समाज पूरी तरह आक्रामक रुख में आ गया है। समाज अब विवादित भूमि पर कथित अवैध कब्जा, अनियमित निर्माण और बिना अनुमति स्कूल संचालन को लेकर खुलकर मोर्चा खोल चुका है।
समाज के अध्यक्ष आर.के. वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि न्यायालय के आदेश के बाद अब किसी भी प्रकार की देरी अस्वीकार्य है और प्रशासन को तत्काल जमीन खाली कराकर समाज को सौंपनी चाहिए।

🔴 एक-एक मुद्दे पर समाज का बड़ा हमला
👉 “बिलियन पब्लिक स्कूल” — आखिर किसने दी हरी झंडी?
समाज ने आरोप लगाया है कि विवादित भूमि पर “बिलियन पब्लिक स्कूल” वर्षों से संचालित हो रहा है, जबकि इसकी वैधानिक अनुमति पर गंभीर सवाल खड़े हैं।
➡️ सबसे बड़ा सवाल: स्कूल को मान्यता के लिए जिस जमीन की जानकारी दी गई, क्या वह वैध थी या कब्जे वाली?
➡️ अगर जमीन विवादित थी, तो फिर मान्यता देने वाली एजेंसियों ने किस आधार पर अनुमति दी?
👉 स्कूल खोलने के लिए किन-किन अनुमति की जरूरत होती है? (बड़ा खुलासा)
किसी भी स्कूल के संचालन के लिए सामान्यतः ये प्रमुख अनुमतियां अनिवार्य होती हैं:
शिक्षा विभाग से मान्यता (Recognition/Affiliation)
स्थानीय निकाय (नगर निगम/पंचायत) से भवन निर्माण अनुमति
भूमि का वैध स्वामित्व या लीज दस्तावेज
फायर सेफ्टी NOC
भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र (Structural Safety Certificate)
स्वच्छता और स्वास्थ्य विभाग की अनुमति
➡️ सवाल यह उठता है कि अगर जमीन ही विवादित या कब्जे की थी, तो ये सभी अनुमति कैसे प्राप्त की गईं?
➡️ क्या दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई या जांच में लापरवाही?
👉 भारी वाहन और बसों का जमावड़ा — सुरक्षा नियमों की अनदेखी?
समाज के अनुसार स्कूल परिसर में दिन-रात बसें और भारी वाहन खड़े रहते हैं।
➡️ इससे न सिर्फ जमीन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जा रही है।
👉 अवैध निर्माण का सबसे बड़ा सवाल
समाज ने आरोप लगाया कि बिना वैधानिक स्वीकृति के विशाल भवन खड़ा कर दिया गया।
➡️ क्या निर्माण के दौरान प्रशासन पूरी तरह अनजान था?
➡️ या फिर कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही या मिलीभगत हुई?
👉 गेट तोड़कर बनाया गया नया रास्ता
आरोप है कि वाहनों की आवाजाही के लिए बिना अनुमति के पुराना गेट तोड़कर नया रास्ता तैयार किया गया।
➡️ यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
👉 धार्मिक आस्था को ठेस — मूर्तियों से छेड़छाड़
समाज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि
बजरंग बली की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया
सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया गया
जीवी
➡️ इस घटना से समाज में भारी आक्रोश है और इसे आस्था पर सीधा हमला बताया जा रहा है।
👉 1985 से समाज का जुड़ाव — परंपराओं पर संकट
समाज का कहना है कि वर्ष 1985 से इस भूमि से उनका गहरा जुड़ाव रहा है।
➡️ यहां नियमित रूप से
सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती
डॉ. खूबचंद बघेल जयंती
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती
जैसे आयोजन होते रहे हैं।
➡️ साथ ही यह स्थान समाज की बैठकों और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
👉 स्पष्ट मांग: “अब एक्शन चाहिए, आश्वासन नहीं”
कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति ने प्रशासन से दो टूक मांग रखी है:
✔️ विवादित भूमि को तत्काल खाली कराया जाए
✔️ जमीन समाज को सौंपी जाए
✔️ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
👉 प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पूरा मामला प्रशासनिक कार्रवाई पर टिक गया है।
समाज ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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यह मामला अब सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं रहा, बल्कि न्यायालय के आदेश, प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक अधिकारों की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
कोर्ट की मुहर के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन कब और कैसे निर्णायक कार्रवाई करता है।


