April 5, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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⚖️ ‘जग्गी हत्याकांड’ में बड़ा झटका: अमित जोगी की याचिका खारिज, कोर्ट ने 3 हफ्ते में सरेंडर का दिया सख्त आदेश ⚖️

 

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//***   रायपुर/बिलासपुर। विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक ‘रामावतार जग्गी हत्याकांड’ में बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को अदालत से तगड़ा झटका लगा है। विशेष अदालत ने उनकी याचिका को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 21 दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करें।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, वहीं इसे मामले में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
🔎 क्या है पूरा मामला?
यह सनसनीखेज मामला 4 जून 2003 का है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी।
इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं।
मामले में अमित जोगी समेत कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप यह था कि राजनीतिक द्वेष के चलते इस हत्या की साजिश रची गई थी, जिसने छत्तीसगढ़ की सियासत को लंबे समय तक प्रभावित किया।
⚖️ अदालत का कड़ा रुख
हालिया सुनवाई में अमित जोगी की ओर से राहत पाने के लिए दायर याचिका पर विस्तृत बहस हुई, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इसे खारिज कर दिया।
कोर्ट ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसी के तहत अमित जोगी को 3 सप्ताह (21 दिन) के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।
🧭 अब क्या हैं विकल्प?
अदालत के इस सख्त आदेश के बाद अमित जोगी के सामने सीमित रास्ते बचे हैं—
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा: वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर सकते हैं।
सरेंडर की मजबूरी: यदि समय रहते किसी उच्च अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद जेल जाना तय माना जा रहा है।
🏛️ सियासी असर तेज
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से उथल-पुथल मचाता रहा है। अब अदालत के इस फैसले के बाद विपक्ष को सत्ताधारी दल और संबंधित राजनीतिक दलों पर हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।
अमित जोगी की पार्टी ‘जेसीसीजे’ के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी का प्रमुख चेहरा ही कानूनी संकट में घिर गया है।
🔥 निर्णायक मोड़ पर मामला
जग्गी हत्याकांड में यह फैसला एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे जग्गी परिवार के लिए यह घटनाक्रम उम्मीद की नई किरण के रूप में देखा जा रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमित जोगी की कानूनी टीम क्या रणनीति अपनाती है—क्या वे सुप्रीम कोर्ट से राहत पाते हैं या फिर उन्हें सरेंडर करना पड़ता है।
👉 फिलहाल इतना तय है कि इस फैसले ने छत्तीसगढ़ की सियासत और न्यायिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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