जंगल के बीच सजा ‘प्रेत दरबार’, ढपढप में उमड़ी आस्था की ऐसी लहर कि दंग रह गए श्रद्धालु



दिव्य श्री हनुमंत कथा के समापन पर बना अद्भुत आध्यात्मिक माहौल, श्रद्धालुओं ने कहा— “जो देखा, वह सामान्य नहीं था”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा/बांकीमोंगरा।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा के समापन अवसर पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया।
कथा के अंतिम दिन यहां ‘प्रेत दरबार’ के नाम से चर्चित आध्यात्मिक दरबार सजा, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
घने जंगलों, मिट्टी की सौंधी महक, भक्ति के जयघोष, भजनों की अनुगूंज और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच सजा यह दरबार सामान्य धार्मिक आयोजन से कहीं अलग दिखाई दिया।
कई श्रद्धालुओं ने इसे अद्भुत, रहस्यमयी, भावनात्मक और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति से भरा बताया।


ढपढप में कथा नहीं, आस्था का विस्फोट हुआ
पांच दिनों तक चली श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज की दिव्य श्री हनुमंत कथा ने पूरे क्षेत्र को भक्ति में डुबो दिया, लेकिन समापन दिवस पर सजा प्रेत दरबार आयोजन का सबसे चर्चित और सबसे अलग पहलू बनकर सामने आया।
श्रद्धालुओं का कहना रहा कि वे कथा सुनने पहुंचे थे, लेकिन समापन दिवस पर जो वातावरण बना, उसने उन्हें भीतर तक प्रभावित कर दिया।
जय श्रीराम, जय बजरंगबली और बागेश्वर धाम सरकार की जय के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ देर तक उसी आध्यात्मिक वातावरण में डूबी रही।
क्या होता है ‘प्रेत दरबार’?

धार्मिक मान्यताओं और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुसार, बागेश्वर धाम में समय-समय पर ऐसा विशेष दरबार लगता है, जहां लोग अपने मानसिक, पारिवारिक, आध्यात्मिक और अदृश्य कष्टों को लेकर पहुंचते हैं।
इसी परंपरा से जुड़ा हुआ यह ‘प्रेत दरबार’ श्रद्धालुओं के बीच लंबे समय से विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है।
बागेश्वर धाम में प्रत्येक शनिवार को लगने वाले ऐसे दरबारों की चर्चा दूर-दूर तक होती रही है, और यही कारण है कि ढपढप में इस तरह का दरबार लगने की खबर ने पहले से ही लोगों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी थी।
श्रद्धालुओं का मानना है कि जहां ईश्वर की शक्ति, मंत्रोच्चार, साधना, हनुमंत कृपा और गुरु का आशीर्वाद होता है, वहां जीवन के कई अदृश्य और मानसिक कष्टों को भी शांति मिलती है।
इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में लोग इस दरबार में पहुंचे।
जंगल के बीच ऐसा दृश्य, जिसे देख गांव वाले भी रह गए हैरान
ग्राम ढपढप जैसा शांत, ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र इस भव्य आयोजन के दौरान पूरी तरह बदल गया।
जंगलों के बीच बसे इस छोटे से गांव में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, लंबी कतारें, जयकारों की गूंज, भक्ति से भरा माहौल और दरबार की रहस्यमयी गंभीरता ने हर किसी को चौंका दिया।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना रहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में इतना विशाल, प्रभावशाली और चर्चा में रहने वाला आध्यात्मिक आयोजन देखा।
कई ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे भी नहीं सोचते थे कि ढपढप की धरती पर ऐसा प्रेत दरबार लगेगा, जिसे देखने के लिए इतनी भीड़ उमड़ पड़ेगी।
श्रद्धालुओं ने बताया ‘अलग अनुभव’
कथा स्थल पर पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने दरबार के दौरान अपने-अपने अनुभव साझा किए।
किसी ने कहा कि वहां पहुंचते ही मन हल्का हो गया, किसी ने कहा कि भीतर की बेचैनी कम हुई, तो कुछ श्रद्धालुओं ने इसे गहरी आध्यात्मिक अनुभूति बताया।
हालांकि ऐसे अनुभव व्यक्ति की आस्था, मनःस्थिति और धार्मिक विश्वास पर भी निर्भर करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट था कि ढपढप में सजा यह दरबार श्रद्धालुओं के मन पर गहरी छाप छोड़ गया।
यही कारण है कि समापन के बाद भी लोग उसी दरबार और उसके वातावरण की चर्चा करते नजर आए।
भक्ति, भजन और रहस्य ने बनाया अलग माहौल
समापन दिवस पर कथा स्थल का माहौल केवल गंभीर आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं था।
भजनों, संकीर्तन, जयघोष और बाबा के दरबार में उमड़ी श्रद्धा ने ऐसा दृश्य बनाया कि पूरा पंडाल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
एक ओर मंच से आध्यात्मिक संदेश, दूसरी ओर श्रद्धालुओं की आंखों में उम्मीद, और बीच में सजा वह चर्चित प्रेत दरबार — यह सब मिलकर ऐसा वातावरण बना रहे थे, जिसे वहां उपस्थित लोग जीवन का दुर्लभ अनुभव बता रहे थे।
ढपढप की धरती बनी आस्था और चर्चा का केंद्र
इस आयोजन ने ग्राम ढपढप को केवल एक ग्रामीण स्थल नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनआस्था, आध्यात्मिक अनुभव और सनातन चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।
कोरबा ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अभूतपूर्व बताया।
जंगल के बीचों-बीच इस तरह का दरबार लगना, हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ना, और समापन दिवस पर बना वह अद्भुत वातावरण—
इन सबने यह साबित कर दिया कि जहां आस्था सच्ची हो, वहां दूरियां, सीमाएं और संसाधन सब छोटे पड़ जाते हैं।
हर ओर एक ही चर्चा— “ढपढप में लगा प्रेत दरबार”
कार्यक्रम के बाद गांव, शहर, बाजार, चौराहों और सोशल मीडिया तक एक ही चर्चा रही—
“ढपढप में लगा प्रेत दरबार।”
लोगों के बीच यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़े आध्यात्मिक अनुभव के रूप में चर्चा में रहा।
कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया, तो कई लोगों ने कहा कि ऐसा दृश्य केवल सुना था, पहली बार आंखों से देखा।


