(कोरबा) खेल परिसर या लापरवाही का अड्डा? सीएसपीडीसीएल जूनियर क्लब में बदइंतजामी से भड़के खिलाड़ी, प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा। शहर के खेल प्रेमियों के लिए बनाए गए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited) के अधीन संचालित जूनियर क्लब की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और नागरिकों में गहरी नाराजगी पनप रही है। खिलाड़ियों का आरोप है कि क्लब परिसर में लंबे समय से नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही है, जिससे खेल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
खिलाड़ियों को खुद उठानी पड़ रही झाड़ू
बैडमिंटन खेलने आने वाले युवाओं ने बताया कि कई बार उन्हें खुद ही कोर्ट और उसके आसपास की सफाई करनी पड़ती है। कोर्ट पर जमी धूल और गंदगी न केवल खेल के स्तर को प्रभावित करती है, बल्कि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है। सवाल उठ रहा है कि जब क्लब के संचालन और रख-रखाव के लिए संसाधन उपलब्ध हैं, तो फिर नियमित सफाई क्यों नहीं हो पा रही?
बिना सूचना ताला—खिलाड़ी लौट रहे निराश
खिलाड़ियों की एक और बड़ी शिकायत यह है कि कई अवसरों पर बिना किसी पूर्व सूचना के क्लब के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया जाता है। निर्धारित समय पर पहुंचने वाले खिलाड़ी घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौट जाते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि खिलाड़ियों के मनोबल को भी तोड़ने वाली है।
जवाबदेही तय क्यों नहीं?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि क्लब का संचालन किसी जिम्मेदार संस्था के अधीन है, तो व्यवस्थाओं में इस तरह की ढिलाई क्यों बरती जा रही है? क्या नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा? क्या सफाई कर्मचारियों की कमी है या फिर प्रबंधन की उदासीनता इसकी वजह है?
खिलाड़ियों का आरोप है कि क्लब संचालन में पारदर्शिता की कमी है। न तो समय-सारणी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाती है और न ही किसी प्रकार की सूचना समय पर दी जाती है। इससे खिलाड़ियों और अभिभावकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
मांगें तेज—व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम
स्थानीय खिलाड़ियों और नागरिकों ने प्रबंधन से तत्काल प्रभाव से नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने, क्लब के खुलने-बंद होने का स्पष्ट समय निर्धारित करने तथा सूचना व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने पर मजबूर होंगे।
खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से बनाए गए इस क्लब की बदहाल स्थिति अब सवालों के घेरे में है। देखना होगा कि प्रबंधन इस बढ़ती नाराजगी को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक व्यवस्थाओं में ठोस सुधार दिखाई देता है।

