घंटाघर में गूंजा जय श्रीराम का जयघोष, रामलीला के मंच से मिला मर्यादा और संस्कारों का संदेश; 20 अक्टूबर को जलेगा रावण का पुतला
1 min read
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया श्रीरामलीला एवं दशहरा उत्सव मेले का भव्य शुभारंभ, बोले—रामचरित मानस और रामलीला जीवन की सम्पूर्ण पाठशाला
राम जन्म से ताड़का वध और अहिल्या उद्धार तक जीवंत हुए रामायण के प्रसंग, छह दिवसीय आयोजन में धर्म, संस्कृति और सनातन परंपरा का दिखेगा भव्य संगम
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। घंटाघर का मैदान जय श्रीराम के जयघोष, धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठा। मंच पर रामायण के प्रसंग जीवंत हुए तो दर्शक भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और धर्मनिष्ठा की प्रेरणादायी गाथा से जुड़ते नजर आए। कहीं प्रभु श्रीराम के जन्म का उल्लास, कहीं अधर्म के अंत का संदेश, तो कहीं सत्य और सदाचार की महिमा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसी आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक गौरव के बीच कोरबा के घंटाघर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर ओपन थियेटर मैदान में नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा आयोजित श्रीरामलीला एवं दशहरा उत्सव मेले का भव्य शुभारंभ हुआ।
छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने श्रीराम दरबार में दीप प्रज्ज्वलित कर उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने रामलीला को केवल धार्मिक कथा का मंचन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली सम्पूर्ण पाठशाला बताया। छह दिनों तक चलने वाला यह आयोजन 20 अक्टूबर को रावण दहन के साथ अपने चरम पर पहुंचेगा।
रामचरित मानस और रामलीला जीवन की सम्पूर्ण पाठशाला : लखनलाल देवांगन
शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानव समाज के लिए आदर्श आचरण, त्याग, सेवा, सत्य, कर्तव्य और मर्यादा की अनुपम मिसाल है। श्रीरामचरित मानस और रामलीला हमें सिखाते हैं कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य और धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। प्रभु श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि वास्तविक महानता सत्ता या वैभव में नहीं, बल्कि कर्तव्य के पालन, वचनों की मर्यादा और जनकल्याण की भावना में निहित है।
मंत्री देवांगन ने कहा कि रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए कोई न कोई महत्वपूर्ण सीख छिपी हुई है। माता-पिता के प्रति सम्मान, भाई के प्रति प्रेम, मित्रता में विश्वास, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और समाज के प्रति समर्पण जैसे आदर्श भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा देते हैं। अधर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा धर्म की स्थापना का संदेश भी रामायण के माध्यम से जन-जन तक पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और गौरवशाली विरासत से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। रामलीला जैसे आयोजन बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के साथ ही परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराते हैं। मंत्री ने आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए महापौर संजूदेवी राजपूत, निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, निगम की पूरी टीम तथा आयोजन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई एवं साधुवाद दिया।

रामलीला के मंच से जागृत होती है सांस्कृतिक चेतना
समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं विद्या भारती मध्य क्षेत्र के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि सांस्कृतिक चेतना को जीवंत बनाए रखने में रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका है। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन से माता-पिता, भाई, मित्र, पत्नी और प्रजा के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा दी। उनके चरित्र में संबंधों की गरिमा, वचन की प्रतिबद्धता और लोककल्याण की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। यही आदर्श भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। उन्होंने नगर निगम द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक उत्सव की सराहना करते हुए आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
श्रीराम के आदर्श अपनाएं, जीवन बने सार्थक : गोपाल मोदी
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं का एक अंश भी यदि हम अपने आचरण में उतार लें, तो मानव जीवन सार्थक बन सकता है। रामलीला हमें सत्य, सदाचार, त्याग, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। ऐसे आयोजन कोरबा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने के साथ ही सामाजिक एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने आयोजन को भव्य स्वरूप देने में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की प्रेरणा और महापौर संजूदेवी राजपूत की पहल की सराहना की।
राम जन्म, शिव-पार्वती संवाद और ताड़का वध ने बांधा समां
रामलीला के प्रथम दिन राम जन्म, शिव-पार्वती संवाद, रावण तप, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से रामायण की घटनाओं को मंच पर सजीव रूप प्रदान किया। इन प्रसंगों ने दर्शकों को भगवान श्रीराम के अवतरण, ऋषि-मुनियों की रक्षा, धर्म की स्थापना और अधर्म पर धर्म की विजय के संदेश से रूबरू कराया।
राम जन्म के प्रसंग ने श्रद्धा और उल्लास का वातावरण बनाया, वहीं ताड़का वध के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध धर्म की शक्ति का संदेश दिया गया। अहिल्या उद्धार के प्रसंग ने भी दर्शकों को भावविभोर किया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस आयोजन में नगरवासियों को रामायण की शिक्षाओं को करीब से समझने का अवसर मिला।
महापौर, सभापति, आयुक्त और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
शुभारंभ अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत, विद्या भारती मध्य क्षेत्र के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ठाकुर, नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर, निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, रणधीर शर्मा सहित मेयर इन काउंसिल के सदस्य, पार्षद, एल्डरमेन और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
20 अक्टूबर तक रामायण के प्रसंगों से सजेगा घंटाघर का मंच
घंटाघर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर ओपन थियेटर मैदान में 15 से 20 अक्टूबर तक आयोजित श्रीरामलीला एवं दशहरा उत्सव के दौरान रामायण के विभिन्न प्रसंगों का क्रमबद्ध मंचन किया जाएगा। प्रत्येक दिन दर्शकों को प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को देखने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
16 अक्टूबर: पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, राजतिलक तथा मंथरा-कैकेयी संवाद का मंचन होगा।
17 अक्टूबर: राम वन गमन, केवट प्रसंग, दशरथ के देवलोक गमन और भरत मिलाप जैसे भावनात्मक प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
18 अक्टूबर: पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, राम-हनुमान मिलन, राम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध और लंका दहन का मंचन होगा।
19 अक्टूबर: सेतु बंध, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाद वध, रावण वध और राज्याभिषेक सहित विभिन्न प्रसंगों का मंचन निर्धारित है।
20 अक्टूबर: उत्सव का समापन रावण दहन और मधुर संगीत के आयोजन के साथ होगा। यह दिन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व रखेगा।
रावण दहन के साथ गूंजेगा धर्म की विजय का संदेश
कोरबा का यह श्रीरामलीला एवं दशहरा उत्सव धार्मिक आयोजन से कहीं बढ़कर सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बनकर सामने आया है। रामलीला का मंच जहां एक ओर सनातन परंपराओं की गौरवशाली विरासत को जीवंत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को संस्कार, मर्यादा और कर्तव्य का महत्व भी समझा रहा है।
भगवान श्रीराम का जीवन संदेश देता है कि परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव, व्यवहार में मर्यादा और जीवन में सत्य का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए। 20 अक्टूबर को होने वाला रावण दहन इसी शाश्वत संदेश को एक बार फिर जन-जन तक पहुंचाएगा कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। घंटाघर में सजी रामलीला की यह सांस्कृतिक धारा कोरबा की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।
