आज राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में मां कूष्मांडा की आराधना का विशेष उत्साह, पूजा में शामिल हों युवा और परिवार—भक्ति, संस्कार और एकता का बनेगा संगम
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नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ होगी पूजा-अर्चना; मालपुआ, फल और मिष्ठान का लगेगा भोग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन बुधवार, 14 अक्टूबर को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित रहेगा। इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में माता रानी की आराधना के साथ धार्मिक उत्साह और सामूहिक सहभागिता को नई ऊर्जा देने की अपील की जा रही है। यहां नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम कॉलोनीवासी बारी-बारी से पूजा में शामिल हो रहे हैं। अब इस भक्तिमय वातावरण में युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी और परिवारों की सामूहिक उपस्थिति आयोजन को और भी खास बना सकती है।
मां कूष्मांडा को सृष्टि की सृजनशक्ति, ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता, साहस, आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाती है। नवरात्रि का यह दिन श्रद्धालुओं को संदेश देता है कि आस्था के साथ जीवन में उत्साह, सद्भाव और अच्छे विचारों को भी स्थान देना चाहिए।
मां कूष्मांडा की पूजा क्यों है विशेष?
मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृजन, ऊर्जा और प्रकाश से जोड़कर पूजा जाता है। उनकी आठ भुजाओं में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और दिव्य वस्तुएं सुशोभित हैं तथा उनका वाहन सिंह है।
नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धालु मां से परिवार की सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में भी इस अवसर को परिवार और समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाले धार्मिक आयोजन के रूप में मनाया जा सकता है।
मां को क्या चढ़ाएं? जानिए भोग और पूजा की परंपरा
1. मालपुआ और मिष्ठान: मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। इसके साथ केसरिया हलवा अथवा अन्य शाकाहारी मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।
2. कुम्हड़ा या पेठा: मां कूष्मांडा के नाम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुम्हड़ा अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
3. फल और नारियल: पूजा में मौसमी फल, नारियल और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है।
4. पुष्प, अक्षत और रोली: मां को ताजे फूल, अक्षत, रोली और जल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
5. दीप-धूप और आरती: पूजा के दौरान दीपक और धूप दिखाकर मां की आरती करें तथा परिवार की सुख-शांति और सभी के मंगल की प्रार्थना करें।
भोग में किसी महंगे सामान की अनिवार्यता नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता और सामूहिक सहभागिता ही पूजा का मूल भाव है। परिवार अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
युवा वर्ग आगे आए, नवरात्रि बने संस्कार और एकता का उत्सव
राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में नवरात्रि का आयोजन केवल पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर भी बने। युवा वर्ग यदि पूजा की तैयारियों, प्रसाद वितरण, बुजुर्गों की सहायता और आयोजन की व्यवस्थाओं में भागीदारी निभाए, तो इससे सेवा, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।
युवा अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पूजा में बैठें, मां की आरती में सहभागी बनें और कॉलोनी के सामूहिक आयोजन में सहयोग करें। इससे धार्मिक परंपराओं को समझने के साथ परिवार के सदस्यों के बीच संवाद और आपसी जुड़ाव भी बढ़ेगा।
एक साथ पूजा, एक साथ खुशियां—यही है नवरात्रि का संदेश
राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 में सुबह और शाम अलग-अलग कॉलोनीवासियों की पूजा में सहभागिता आयोजन की खूबसूरती बढ़ा रही है। यदि युवा, बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और परिवार एक साथ आराधना में शामिल हों, तो यह आयोजन सामाजिक एकता और सामूहिक सद्भाव की मिसाल बन सकता है।
डांडिया की उमंग, माता रानी के जयकारे, आकर्षक स्टॉल और बच्चों के झूलों के बीच पूजा का यह वातावरण नवरात्रि की रौनक को और बढ़ा रहा है। मां कूष्मांडा के चौथे दिन श्रद्धा के साथ एक-दूसरे का सहयोग करने और जरूरतमंदों की सहायता का संकल्प भी लिया जा सकता है।
आइए, इस नवरात्रि मां कूष्मांडा की आराधना में परिवार सहित सहभागी बनें। युवा आगे आएं, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और राजेंद्र प्रसाद नगर फेस-1 को भक्ति, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता के रंगों से सजाएं। जय माता दी!
