October 9, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

भ्रांतियों की दीवार तोड़ें, जागरूकता से जीतें एचआईवी/एड्स के खिलाफ जंग! बांकी मोंगरा महाविद्यालय में विद्यार्थियों को दिया जागरूकता का संदेश

1 min read

 

 

रेड रिबन क्लब और राष्ट्रीय सेवा योजना की संयुक्त पहल, विशेषज्ञों ने बताए संक्रमण से बचाव, जांच और उपचार के उपाय; संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव नहीं, संवेदनशीलता अपनाने की अपील

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// बांकी मोंगरा/कोरबा। सही जानकारी ही जागरूक समाज की सबसे बड़ी ताकत है। एचआईवी/एड्स को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने, युवाओं को जागरूक बनाने और संक्रमित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से शासकीय नवीन महाविद्यालय बांकी मोंगरा में प्रथम वार्षिक उन्मुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। रेड रिबन क्लब और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को एचआईवी संक्रमण के कारणों, बचाव, जांच और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति एवं छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एचआईवी/एड्स के विरुद्ध लड़ाई केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता, सही जानकारी और भेदभावमुक्त व्यवहार भी आवश्यक हैं।

 

 

 

समय पर जांच और उपचार से बेहतर जीवन संभव

कार्यक्रम में रेड रिबन क्लब के नोडल अधिकारी रविन्द्र कुमार पैकरा ने एचआईवी/एड्स के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संक्रमण के फैलने के माध्यमों, बचाव के उपायों, जांच की उपलब्ध सुविधाओं और उपचार के महत्व की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एचआईवी की समय पर पहचान और उचित चिकित्सा से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और परिवार तथा समाज में भी प्रमाणिक जानकारी पहुंचाकर जागरूकता का प्रसार करें।

साथ बैठने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता एचआईवी

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं वाणिज्य के सहायक प्राध्यापक रघुराज सिंह तंवर ने एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में प्रचलित भ्रांतियों और उनसे उत्पन्न भेदभाव पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ बैठने, भोजन करने, हाथ मिलाने या सामान्य रूप से साथ रहने से संक्रमण नहीं फैलता।

उन्होंने कहा कि गलत धारणाओं के कारण कई बार लोग जांच कराने और उपचार प्राप्त करने से हिचकिचाते हैं। ऐसी स्थिति में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी साझा करें तथा एचआईवी से प्रभावित व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करें।

जागरूक युवा, स्वस्थ समाज की मजबूत नींव

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर सही जानकारी होना जरूरी है। एचआईवी संक्रमण के प्रति जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार, समय पर जांच और चिकित्सा परामर्श अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है। साथ ही, संक्रमित व्यक्तियों को सामाजिक तिरस्कार के बजाय सहयोग और सम्मान मिलना चाहिए।

महाविद्यालय में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज में जागरूकता के वाहक के रूप में तैयार करना भी रहा।

प्राध्यापकों और कर्मचारियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक विजय कुमार लहरे (रसायनशास्त्र), अखिलेश कुमार उईके (राजनीतिशास्त्र), रघुराज सिंह तंवर (वाणिज्य एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी), अशोक कुमार श्रीवास (अंग्रेजी), गुलाब सिंह कंवर (वाणिज्य) तथा पुरुषोत्तम सिंह कंवर (हिन्दी) उपस्थित रहे।

इसके अलावा प्रयोगशाला तकनीशियन रामसेवक पैकरा, प्रयोगशाला परिचारक राजेन्द्र पैकरा, अतिथि व्याख्याता डॉ. प्रवीण श्याम (वनस्पति विज्ञान), डॉ. श्रद्धा दुबे (गणित) और डॉ. श्रेष्ठ भोंसले (भौतिकी) ने भी सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

जागरूकता फैलाने का संकल्प, हेल्पलाइन की भी दी जानकारी

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने, सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और प्रभावित व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि एचआईवी/एड्स से संबंधित जानकारी और परामर्श के लिए राष्ट्रीय एड्स हेल्पलाइन नंबर 1097 पर संपर्क किया जा सकता है।

अंत में महाविद्यालय परिसर में सामूहिक छायाचित्र लिया गया। इस आयोजन ने संदेश दिया कि एचआईवी/एड्स के विरुद्ध प्रभावी प्रयासों के लिए चिकित्सा सुविधाओं के साथ जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और मानवीय संवेदना भी उतनी ही आवश्यक हैं। सही जानकारी अपनाकर और भेदभाव से दूर रहकर ही एक जागरूक एवं संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.