जनप्रतिनिधि पहुंचे, अधिकारी गायब! करतला जनपद की बैठक फिर ठप
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चार बार हिदायत के बाद भी नहीं सुधरी तस्वीर, खाद्य-शिक्षा विभाग को छोड़ कई विभाग रहे नदारद; अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नाराजगी—जनता की समस्याओं पर जवाब देगा कौन?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// करतला। जनपद पंचायत करतला की महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी के चलते सवालों के घेरे में आ गई। जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बैठक में मौजूद रहे, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे। नतीजा यह रहा कि जनता से जुड़े कई अहम मुद्दे संबंधित विभागों के सामने रखे ही नहीं जा सके और बैठक को स्थगित करना पड़ा।
सबसे गंभीर बात यह है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का मामला नया नहीं है। जनप्रतिनिधियों के अनुसार इस संबंध में चार बार हिदायत दी जा चुकी है और मामला जनपद सीईओ के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। इसके बावजूद फिर वही स्थिति सामने आने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी देखी गई।
जनप्रतिनिधि पूरी तैयारी से पहुंचे, विभागीय अधिकारी नहीं
जनपद की बैठक कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा शासन की विभिन्न योजनाओं से जुड़े सवाल जनप्रतिनिधि बैठक में लेकर पहुंचते हैं।
इस बार भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जनपद सदस्यों की उपस्थिति रही। लेकिन कई विभागों के अधिकारी अनुपस्थित रहे। खाद्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अन्य विभागों की गैरमौजूदगी के कारण उनके विषयों पर सीधे सवाल-जवाब और तत्काल चर्चा नहीं हो सकी।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं का जवाब लेने के लिए बैठक में मौजूद हैं, तो संबंधित विभागों की अनुपस्थिति में जवाबदेही कैसे तय होगी?
चार बार हिदायत के बाद भी नहीं बदली स्थिति
अधिकारियों की बैठक में अनुपस्थिति को लेकर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। बताया गया है कि संबंधित अधिकारियों को चार बार हिदायत दी गई। मामला जनपद सीईओ के संज्ञान में भी पहुंचाया गया।
इसके बावजूद यदि अगली महत्वपूर्ण बैठक में फिर कई विभागों के अधिकारी मौजूद नहीं रहते हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन किस स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है।
हिदायत के बाद भी अनुपस्थिति—क्या अब सिर्फ निर्देश पर्याप्त हैं या जवाबदेही भी तय होगी? यही सवाल इस पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
जनप्रतिनिधियों का समय, जनता की उम्मीद और बैठक की उपयोगिता
जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों से जनता की समस्याएं लेकर बैठक में पहुंचते हैं। उनके पीछे उन ग्रामीणों की उम्मीद होती है, जो सरकारी विभागों से समाधान की अपेक्षा रखते हैं।
लेकिन जब संबंधित विभाग का अधिकारी ही बैठक में उपस्थित न हो, तो जनप्रतिनिधि उस विभाग से जवाब कैसे लें? समस्या की वर्तमान स्थिति कैसे जानें? कार्रवाई की समयसीमा कैसे तय करें?
बैठक का उद्देश्य ही विभागों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा समन्वय स्थापित कर क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा करना है। ऐसे में बार-बार अधिकारियों की अनुपस्थिति से बैठक की कार्यवाही प्रभावित होना गंभीर प्रशासनिक समन्वय का विषय बन जाता है।
सीईओ के संज्ञान में मामला, फिर भी सवाल बरकरार
यहां सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न जनपद सीईओ की भूमिका को लेकर भी सामने आता है। जब अधिकारियों की अनुपस्थिति का मामला पहले ही सीईओ के संज्ञान में लाया जा चुका है और हिदायत भी दी जा चुकी है, तो फिर सभी संबंधित विभागों की उपस्थिति सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई?
यदि किसी अधिकारी के लिए बैठक में पहुंचना संभव नहीं था, तो क्या इसकी पूर्व सूचना दी गई थी? क्या उनकी ओर से किसी सक्षम प्रतिनिधि को भेजा गया था? यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस स्थिति की जिम्मेदारी किसकी होगी?
इन सवालों का जवाब इसलिए जरूरी है क्योंकि मामला केवल एक बैठक का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उठने वाली ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया से जुड़ा है।
अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित सदस्यों की नाराजगी
अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सदस्यों ने नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे बैठक में व्यक्तिगत काम लेकर नहीं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं लेकर आते हैं।
ऐसे में यदि अधिकारी ही उपलब्ध नहीं होंगे तो जनता से जुड़े सवालों का जवाब कौन देगा और समाधान की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
जनप्रतिनिधियों की यह नाराजगी अब महज बैठक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित विभागों की उपस्थिति और जवाबदेही की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट कार्रवाई की जरूरत की ओर इशारा करती है।
बैठकें सिर्फ खानापूर्ति न बन जाएं, उठने लगा सवाल
बार-बार अधिकारियों की अनुपस्थिति और उसके कारण बैठक स्थगित होने की स्थिति ने जनपद की बैठकों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि जनप्रतिनिधि समय पर बैठक में पहुंचें, जनता से जुड़े मुद्दे तैयार करके लाएं और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद न रहें, तो चर्चा अधूरी रहना स्वाभाविक है। इसका सीधा असर उन समस्याओं पर पड़ता है, जिनके समाधान की उम्मीद लेकर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों तक पहुंचते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या आगामी बैठक में सभी संबंधित विभागों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित होगी या फिर जनप्रतिनिधियों को एक बार फिर अधिकारियों का इंतजार करना पड़ेगा?
अब हिदायत नहीं, व्यवस्था और जवाबदेही की जरूरत
चार बार हिदायत दिए जाने के बावजूद स्थिति दोबारा सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों की मांग है कि आगामी बैठकों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
यदि कोई अधिकारी अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सकता, तो उसकी पूर्व सूचना और सक्षम प्रतिनिधि की उपस्थिति सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दे सिर्फ इसलिए लंबित न रहें कि संबंधित अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे।
करतला जनपद की इस बैठक ने एक सीधा सवाल सामने रख दिया है—जनप्रतिनिधि जनता की आवाज लेकर बैठक में पहुंच रहे हैं, लेकिन जब संबंधित अधिकारी ही सामने नहीं होंगे तो उन सवालों का जवाब कौन देगा?
अब निगाह अगली बैठक पर है। देखना होगा कि अगली बार करतला जनपद की बैठक में जनप्रतिनिधियों के साथ सभी संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहते हैं या फिर बैठक की कार्यवाही एक बार फिर अनुपस्थिति के कारण प्रभावित होती है।







