RDA की जमीन पर कांग्रेस के सवालों को भाजपा का करारा जवाब, पाण्डेय बोले—विकास की नीति को सियासी चश्मे से न देखे कांग्रेस
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में भू-खण्डों के पुनर्गठन और आवंटन को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक कुण्ठा से प्रेरित, तथ्यहीन और विकास योजनाओं को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश बताया। यह विवाद मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी को कचना की जमीन के बदले सड्डू में लगभग 23 हजार वर्गफीट का भू-खण्ड दिए जाने के कांग्रेस के आरोप के बाद सामने आया है।
‘किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बनी योजना, 17 भू-स्वामियों के भू-खण्डों का हुआ पुनर्गठन’
एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पाण्डेय ने कहा कि नगर विकास योजना कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित शहरीकरण के लिए भू-अर्जन और भूमि विकास के माध्यम से भू-स्वामियों को विकसित क्षेत्र में निर्धारित हिस्सेदारी देने जैसी व्यवस्थाएं लागू होती रही हैं। उनके अनुसार, इसी तरह की योजना के तहत कमल विहार, जिसे अब कौशल्या विहार कहा जाता है, को भी विकसित किया गया था।

पाण्डेय ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को केवल मंत्री केदार कश्यप से जोड़कर देखना वास्तविक तस्वीर को नजरअंदाज करना है। उनके मुताबिक 17 ऐसे भू-स्वामी हैं, जिनके बड़े अथवा अनियमित भू-खण्डों के पुनर्गठन के बाद उन्हें योजना के अनुरूप नए भू-खण्ड दिए गए हैं।
‘सड़क के किनारे बड़े भू-खण्ड, पीछे छोटे भू-खण्ड—यही है नगर नियोजन की रणनीति’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बड़े भू-खण्डों को ऐसे स्थानों पर रखा गया है जहां भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियों और बेहतर परिवहन व्यवस्था की संभावना हो। वहीं छोटे भू-खण्डों को पीछे की ओर व्यवस्थित किया गया है। उनका तर्क था कि यदि किसी बड़े भू-खण्ड को संकरी गली में छोड़ दिया जाए और भविष्य में वहां व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ें तो यातायात की समस्या पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मार्ग की कनेक्टिविटी रायपुर के यातायात दबाव को कम करने में उपयोगी हो सकती है। भाजपा का कहना है कि नगर नियोजन का उद्देश्य केवल जमीन का पुनर्गठन नहीं, बल्कि सड़क, आवागमन, जल निकासी और भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर व्यवस्थित विकास करना है।
‘कांग्रेस बताए—बड़े भू-खण्डों को आखिर कहां दिया जाए?’
पाण्डेय ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी भू-स्वामी के पास बड़ा भू-खण्ड है और पुराना हिस्सा ऐसी जगह है जहां भविष्य में व्यावसायिक उपयोग अथवा परिवहन की सुविधा संभव नहीं है, तो पुनर्गठन के दौरान उसे उसी क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी वाला भू-खण्ड देना नगर नियोजन का हिस्सा हो सकता है।
उन्होंने आनंद कुकरेजा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी बड़े भू-क्षेत्र के पुनर्गठन के तहत सड़क से जुड़े क्षेत्र में जमीन दी गई है। भाजपा का तर्क है कि इसलिए केवल मंत्री के परिवार से जुड़े भू-खण्ड को अलग करके सवाल खड़ा करना पूरी योजना की प्रकृति को नजरअंदाज करना है।
RDA उपाध्यक्ष ने भी रखा नियमों का पक्ष
पत्रकार वार्ता में रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने कहा कि नगर वन क्षेत्र में विकास योजना के प्रावधानों के तहत मार्ग संरचना में आने वाले भू-खण्डों का विस्थापन नियमानुसार किया गया है। उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय परिस्थितियों और जल स्रोतों से जुड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों पर लागू प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए भू-स्वामियों को दूसरे स्थानों पर भू-खण्ड आवंटित किए गए हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार अनियमित आकार वाले भू-खण्डों को नियमित आकार देकर पुनर्गठित किया गया है और संबंधित भू-स्वामी को उसके मूल गांव में ही भू-खण्ड देने की तकनीकी व्यवस्था अपनाई गई है।
उन्होंने बताया कि 2000 वर्गमीटर से बड़े भू-खण्डों को सड़क किनारे तथा 1000 वर्गमीटर या उससे छोटे भू-खण्डों को पीछे की ओर रखने की योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में बड़े व्यावसायिक उपयोग वाले क्षेत्रों में प्रवेश और निकास की व्यवस्था बेहतर रहे।
‘चेहरा देखकर नहीं, नियम देखकर हुआ आवंटन’
RDA उपाध्यक्ष ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज किया कि किसी व्यक्ति को विशेष लाभ देने के लिए भू-खण्ड चिह्नित किया गया। उन्होंने कहा कि आवंटन प्रक्रिया भू-खण्ड के आकार, स्थान, सड़क संपर्क और नगर नियोजन की आवश्यकता के आधार पर की गई है।
वहीं पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस यदि किसी नियम के स्पष्ट उल्लंघन का तथ्य सामने रखती है तो उसे दस्तावेजों के साथ सामने आना चाहिए। केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नगर विकास की पूरी योजना को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
भाजपा का पलटवार—‘विकास को विवाद का विषय बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश’
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि शहर के विकास और नगर नियोजन जैसे विषयों को राजनीतिक विवाद में बदलकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सड़क, यातायात, जल निकासी और व्यवस्थित बसाहट की जरूरत को नजरअंदाज करके केवल भू-खण्डों की कीमत और स्थान को लेकर सवाल उठाना अधूरी तस्वीर पेश करता है।
पाण्डेय ने कहा कि नगर नियोजन किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस से आरोपों के बजाय नियम, दस्तावेज और पूरी योजना के आधार पर चर्चा करने की चुनौती दी।
पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया सह-संयोजक गोविन्दा गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अगर इसे और फ्रंट-पेज वाली ज्यादा तीखी शैली में करना हो, तो मुख्य शीर्षक का एक और विकल्प होगा: “कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: ‘RDA की विकास योजना को सियासी रंग देकर भ्रम फैला रही कांग्रेस’”.







